मझौली में वन विभाग का शर्मनाक खेल: रक्षक ही बने भक्षक, क्या माफिया की खातिर सरकारी खजाने से कट रही है तनख्वाह?

 मझौली वृत्त में माफिया ने चीरा जंगलों का सीना, दिनदहाड़े गरजे बुलडोजर और डंपर

  सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर रातों-रात तार फेंसिंग और कब्जे, बीट गार्ड से लेकर रेंजर तक साधे मौन

 * ग्रामीणों का तीखा सवाल: ‘जंगल बचाने का वेतन ले रहे हैं या कटाई-खुदाई का कमीशन?’

सिहोरा/मझौली

सिहोरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मझौली वृत्त में कानून और जंगल, दोनों को रसूखदार माफिया अपने तलवों तले बेरहमी से रौंद रहे हैं। हरियाली की हिफाजत और वन्यजीवों के संवर्धन के नाम पर सरकारी खजाने से हर महीने लाखों रुपये का वेतन डकारने वाला वन विभाग का मैदानी अमला आंख, कान और मुंह पर पट्टी बांधकर बैठ चुका है। विभागीय संरक्षण की छांव तले जंगल की सीमाओं को मिटाकर मुरम, पत्थर का अंधाधुंध अवैध उत्खनन और बेशकीमती जमीनों की बंदरबांट का खुला खेल जारी है। हालात देखकर स्थानीय बाशिंदे अब सीधे सवाल दाग रहे हैं—आखिर इन वर्दीधारियों को सरकार वन संपदा बचाने का वेतन दे रही है या माफिया की तिजोरी भरने की दलाली?

दिनदहाड़े सीना चीर रहीं पोकलेन, डंपरों से ढोई जा रही वन संपदा

मझौली वन क्षेत्र के कई संवेदनशील बीटों में हालात बद से बदतर हो चुके हैं। दिन के उजाले से लेकर रात के सन्नाटे तक जंगलों के भीतर पोकलेन और जेसीबी मशीनें बेखौफ गरज रही हैं। खनिज संपदा से लदे डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के पहिए जंगलों के पारिस्थितिकीय तंत्र को नेस्तनाबूद कर रहे हैं।

अवैध खननकर्ताओं ने वन मार्गों को अपनी निजी जागीर बना रखा है। न तो वन विभाग के नाकों पर कोई चेकिंग होती है और न ही गश्ती दलों को यह तबाही नजर आती है। मुरम और बोल्डर के अवैध दोहन से जंगलों में बने कई फीट गहरे जानलेवा गड्ढे न केवल पर्यावरण के लिए नासूर बन चुके हैं, बल्कि बेजुबान वन्यजीवों के लिए भी रोज मौत का फंदा साबित हो रहे हैं।

सुनियोजित सिंडिकेट: पहले कटाई, फिर फेंसिंग और जुताई

खनन से भी बड़ा और खतरनाक खेल वन भूमि पर अवैध कब्जे का चल रहा है। माफिया तत्वों ने विभागीय मिलीभगत से सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा जमाने का एक त्रि-स्तरीय सिंडिकेट तैयार कर लिया है:

 * चरण 1 (सफाई): रात के अंधेरे में सुनियोजित तरीके से जंगल की झाड़ियों और पेड़ों का सफाया किया जाता है।

 * चरण 2 (घेराबंदी): रातों-रात पत्थरों की दीवार और कंटीले तारों की फेंसिंग खड़ी कर दी जाती है।

 * चरण 3 (समतलीकरण): सुबह होते ही ट्रैक्टर चलाकर सरकारी जंगल को निजी खेत या प्लॉटिंग में तब्दील कर दिया जाता है।

यह पूरी लूट मुख्य वन मार्गों के इर्द-गिर्द हो रही है। ऐसे में नियमित निरीक्षण का दावा करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की नजरें इन कब्जों पर क्यों नहीं पड़तीं, यह रहस्य विभागीय साख पर कालिख पोतने के लिए काफी है।

गश्त के नाम पर खानापूर्ति, ‘अज्ञात’ के नाम पर दबती हैं फाइलें

ग्रामीणों का खुला आरोप है कि बीट गार्ड से लेकर सर्किल स्तर के जिम्मेदारों तक हर अवैध गतिविधि का ‘मासिक नजराना’ तय है। जब भी कोई सजग नागरिक या पर्यावरण प्रेमी अवैध उत्खनन की सूचना देता है, तो टीम के पहुंचने से पहले ही माफिया को फोन पर सतर्क कर दिया जाता है।

अमला मौके पर तब पहुंचता है जब मशीनें सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच चुकी होती हैं। इसके बाद केवल कागजी खानापूर्ति के लिए ‘अज्ञात’ के खिलाफ पीओआर (प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट) काटकर फाइलों को दफ्तर के बस्ते में दबा दिया जाता है। वर्षों से एक ही सर्किल और हल्के में अंगद की तरह पैर जमाए बैठे मैदानी कर्मचारियों का स्थानीय सिंडिकेट से ऐसा गहरा गठजोड़ बन चुका है, जिसे सामान्य प्रशासनिक दावों से तोड़ पाना नामुमकिन नजर आ रहा है।

ड्रोन सर्वे और विजिलेंस जांच की दरकार

मझौली के अस्तित्व पर मंडराते इस खतरे को देखते हुए पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने जबलपुर मुख्य वन संरक्षक (CCF), डीएफओ और लोकायुक्त से उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की मांग की है।

 जनता की प्रमुख मांगें:

 * मझौली वन वृत्त के समस्त बीटों का राजस्व और वन विभाग के संयुक्त दल द्वारा डिजिटल व ड्रोन सीमांकन कराया जाए।

* विगत वर्षों की सैटेलाइट इमेजरी (उपग्रह चित्रों) का मिलान कर काटे गए जंगल और खुदे हुए खदान क्षेत्रों का सही रकबा तय हो।

 वर्षों से एक ही सर्किल में जमे बीट गार्डों और मैदानी अमले का तत्काल गैर-जिले में तबादला कर उनकी संपत्तियों की विजिलेंस जांच हो।

यदि समय रहते शासन-प्रशासन ने इस बेलगाम लूट पर सख्त चाबुक नहीं चलाया, तो मझौली का समृद्ध वन परिक्षेत्र आने वाले दिनों में केवल नक्शों और सरकारी अभिलेखों तक ही सिमट कर रह जाएगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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