सरपंच, उपयंत्री अश्विनी तिवारी और देवर कैलाश चौकसे के गठजोड़ पर आरोप; जांच न होने से मामला पहुंचा कलेक्टर जनसुनवाई
* स्वीकृत ₹3.66 लाख में से बिना काम शुरू हुए ही निकाल ली गई ₹2.52 लाख की शासकीय राशि
* विश्वकर्मा ट्रेडर्स के संदेहास्पद बिलों से खेल: बिना GST नंबर 5% टैक्स जोड़ा, एक ही नंबर के दो बिल पोर्टल पर दर्ज
मझौली/जबलपुर।
जनपद पंचायत मझौली की ग्राम पंचायत टिकुरी में शासकीय धन के बंदरबांट और विकास कार्यों में कागजी बाजीगरी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत टिकुरी में शांति धाम पहुंच मार्ग (सड़क निर्माण) के नाम पर स्वीकृत बजट में से धरातल पर एक इंच काम कराए बिना ही लाखों रुपये के कथित फर्जी बिल लगाकर राशि आहरित कर ली गई। मामले में सरपंच सीतादेवी चौकसे, उनके देवर कैलाश चौकसे और उपयंत्री (सब-इंजीनियर) अश्विनी तिवारी की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे हैं। जनपद स्तर पर शिकायत के बावजूद जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब परेशान ग्रामीणों ने संभागायुक्त जबलपुर, जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर जनसुनवाई का दरवाजा खटखटाया है।
धरातल पर काम नहीं, खाते से उड़ गए ₹2.52 लाख
शिकायतकर्ता सुरेश बर्मन, राजगोपाल तिवारी और प्रफुल्ल खरे द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम पंचायत टिकुरी में शांति धाम सड़क निर्माण कार्य के लिए कुल ₹3,66,000 की प्रशासनिक स्वीकृति जारी हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि स्वीकृति के दो माह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद मौके पर सड़क निर्माण का कोई काम शुरू नहीं हुआ। इसके उलट, 2 जुलाई 2026 को सांठगांठ कर ₹2,52,000 की भारी-भरकम राशि पंचायत खाते से आहरित कर ली गई।
फर्जी बिल, कर चोरी और पोर्टल पर आंकड़ों का खेल
शिकायतकर्ताओं ने साक्ष्यों के साथ पूरे मामले में वित्तीय अनियमितताओं के बिंदुवार खुलासे किए हैं:
* बिना GST नंबर के बिल पर टैक्स वसूली: सामग्री आपूर्ति के नाम पर ‘विश्वकर्मा ट्रेडर्स’ के जो बिल लगाए गए हैं, उन पर कोई GST नंबर दर्ज नहीं है। इसके बावजूद पूरे बिल पर 5% की दर से GST जोड़ दिया गया, जो सीधे तौर पर टैक्स चोरी और कूटरचना का मामला बनता है।
* एक ही नंबर और तारीख के दो बिल: पोर्टल पर 2 जुलाई 2026 की एक ही तारीख में ₹1,26,000 और ₹1,26,000 के दो अलग-अलग बिल (बिल क्र. 941 एवं 0941) दर्शाए गए हैं।
* पोर्टल और कागजी बिलों में भारी विसंगति: पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज राशि और भौतिक बिलों के आंकड़ों में भारी अंतर है। पोर्टल पर बिलों की राशि क्रमशः ₹32,000 एवं ₹94,000 दिख रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रस्तुत बिलों पर न तो सरपंच और न ही सचिव के अनिवार्य हस्ताक्षर व पदमुद्रा (सील) मौजूद हैं।
सरपंच, उपयंत्री अश्विनी तिवारी और देवर के गठजोड़ पर सवाल
शिकायतकर्ताओं का सीधा आरोप है कि टिकुरी पंचायत में सरपंच सीतादेवी चौकसे, उनके देवर कैलाश चौकसे और उपयंत्री अश्विनी तिवारी के प्रभाव व मिलीभगत से यह पूरा खेल खेला गया। निर्माण कार्यों के भौतिक सत्यापन और मूल्यांकन के बिना ही उपयंत्री अश्विनी तिवारी द्वारा फाइलों और मूल्यांकन रिपोर्ट को कथित तौर पर आगे बढ़ा दिया गया। जब स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारों ने इन गंभीर शिकायतों को दबाने का प्रयास किया, तो ग्रामीणों को जिला मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ी।
कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचा मामला, 30 दिन में जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए 29 सितंबर 2026 को जबलपुर कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष यह मामला रखा गया। जनसुनवाई से पावती क्रमांक 26 जारी कर संबंधित विभाग (जिला पंचायत) को 30 दिवस के भीतर जांच कर निराकरण करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। संभागायुक्त कार्यालय जबलपुर संभाग को भी शिकायत की प्रति सौंपी गई है।
ग्रामीणों ने दो टूक मांग की है कि मामले की निष्पक्ष स्थलीय जांच कराकर आहरित की गई पूरी राशि की वसूली भू-राजस्व के बकाए की तरह की जाए और शासकीय धन का गबन करने वाले सरपंच, उपयंत्री अश्विनी तिवारी, देवर कैलाश चौकसे व संबंधित फर्म पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।




