घटिया सामग्री और भ्रष्टाचार का खेल: कटंगी बस स्टैंड के 2.40 करोड़ के नवीनीकरण में मानकों की उड़ीं धज्जियां, 12 MM की जगह ठोंका जा रहा 7 से 9 MM का सरिया!

जनता के टैक्स के पैसों और सार्वजनिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ का एक बेहद चौंकाने वाला मामला कटंगी से सामने आया है।

कटंगी (जबलपुर)

कटंगी बस स्टैंड के पुनर्विकास और जीर्णोद्धार के नाम पर स्वीकृत ₹2.40 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल खेला जा रहा है। निर्माण स्थल पर तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखकर ऐसा कमजोर ढांचा खड़ा किया जा रहा है, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है।

20% ‘बिलो’ में लिया ठेका, अब घाटा पूरा करने के लिए घटिया सामग्री का सहारा!

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कटंगी बस स्टैंड को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने के लिए शासन द्वारा 2 करोड़ 40 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। टेंडर प्रक्रिया के दौरान ठेकेदार ने प्रतिस्पर्धा में बाजी मारने के लिए निर्धारित दरों से लगभग 20 प्रतिशत कम (Below) पर बोली लगाई, जिसके बाद यह काम करीब 1 करोड़ 89 लाख रुपये में ठेकेदार को आवंटित कर दिया गया।

लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि टेंडर हासिल करने के चक्कर में लगाई गई कम दर का घाटा क्या जनता की जान जोखिम में डालकर पूरा किया जा रहा है? निर्माण कार्य शुरू होते ही जिस तरह की सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है, उससे साफ जाहिर है कि गुणवत्ता और मजबूती से समझौता किया जा रहा है।

तकनीकी मापदंड दरकिनार: एस्टीमेट में 12 MM, मौके पर लगाया जा रहा 7-9 MM सरिया!

निर्माण स्थल पर पिलर और नींव की ढलाई में इस्तेमाल हो रहे सरिए (Steels) का जब जायजा लिया गया, तो धांधली की पोल खुलकर सामने आ गई। विभागीय एस्टीमेट और सुरक्षित सिविल निर्माण के मानकों के अनुसार, पिलर में न्यूनतम 12 एमएम (MM) का सरिया इस्तेमाल होना अनिवार्य है। लेकिन मौके पर हो रही फर्जीवाड़े की तस्वीर कुछ इस प्रकार है:

 * पिलरों के निर्माण में: 12 एमएम के मजबूत सरिए के स्थान पर महज 9 एमएम का सरिया इस्तेमाल किया जा रहा है।

 * पिलर कैप व कॉलम बेस में: पिलर को मजबूती देने वाले कैप में केवल 7 एमएम का पतला सरिया लगाया जा रहा है।

किसी भी सार्वजनिक भवन या बस स्टैंड जैसी जगह पर, जहाँ हर दिन सैकड़ों बसें और हज़ारों यात्रियों की आवाजाही होती है, वहाँ नींव और पिलर में इस स्तर की घटिया सामग्री का इस्तेमाल सीधे-सीधे हादसों को न्योता देना है।

विभागीय मॉनिटरिंग पर उठे तीखे सवाल: अधिकारी मौन, ठेकेदार बेखौफ!

लाखों-करोड़ों के सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की निगरानी के लिए विभागीय इंजीनियर और सब-इंजीनियर तैनात होते हैं। ऐसे में खुलेआम मानकों की धज्जियां उड़ना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

 * साठगांठ का खेल: क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार के बीच सब कुछ ‘मैनेज’ है, जो इतने बड़े पैमाने पर मानकहीन सरिया इस्तेमाल हो रहा है?

 * जांच से दूरी: क्या विभागीय जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी मौके पर पहुंचकर सैंपलिंग की या सरिए का व्यास (Thickness) नापने की जहमत उठाई?

 * जनसुरक्षा से समझौता क्यों: जब ठेका 20% बिलो पर दिया गया, तो विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती थी कि काम की गुणवत्ता प्रभावित न हो। फिर यह खुली छूट क्यों दी गई?

अब प्रशासन के कड़े रुख का इंतजार

करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस बस स्टैंड के निर्माण में गुणवत्ता से किया गया समझौता सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि जनसुरक्षा से किया जा रहा आपराधिक खिलवाड़ है। क्षेत्र की जनता अब मांग कर रही है कि इस मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदार समेत लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई हो।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस भ्रष्टाचार पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं, या फिर हमेशा की तरह कागजी जांच की लीपापोती कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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