मझौली वन परिक्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न बीटों में पदस्थ चौकीदारों और वनचौकी सहायकों की नियुक्ति, चयन प्रक्रिया और मानदेय भुगतान में धांधली की आशंका गहराने लगी है।

इस मामले पर जब सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 के तहत जानकारी मांगी गई, तो कार्यालय वन परिक्षेत्र अधिकारी (सामान्य), सिहोरा ने अजीबोगरीब तर्क देकर जानकारी देने से पूरी तरह इनकार कर दिया।

मझौली/सिहोरा

अधिकारी द्वारा जारी पत्र क्रमांक 11110 (दिनांक 31/07/2026) के माध्यम से आवेदक को दिए गए जवाब के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

1. एक आवेदन में एक ही विषय का बहाना

आवेदक शिवम साहू (निवासी- वार्ड नं. 10, मझौली) ने 19 जून 2026 को RTI आवेदन दायर कर मझौली वन परिक्षेत्र में कार्यरत चौकीदारों की नियुक्ति प्रक्रिया, स्वीकृत पदों, भुगतान अभिलेखों और विभागीय स्वीकृतियों से जुड़े दस्तावेज मांगे थे।

इस पर सिहोरा वन परिक्षेत्र अधिकारी ने यह तर्क देकर आवेदन खारिज करने का प्रयास किया कि शासकीय नियमानुसार एक आवेदन में केवल एक ही विषय की जानकारी दी जा सकती है, इसलिए केवल एक बिंदु पर जानकारी देना ही संभव है।

2. “श्रमिकों की असहमति” का दिया हवाला, धारा 8(1)(ञ) के तहत जानकारी रोकी

सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब वन विभाग ने जानकारी न देने के लिए धारा 8(1)(ञ) (व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता) का सहारा लिया। वन परिक्षेत्र अधिकारी ने अपने पत्र में लिखा कि:

 “श्रमिकों के द्वारा अपनी व्यक्तिगत जानकारी होने के कारण असहमति व्यक्त की गई है। अतः सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8(1)(ञ) के अनुसार जानकारी दिया जाना संभव नहीं है।”

शासकीय धन से मानदेय प्राप्त करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और भुगतान के ब्यौरे को “व्यक्तिगत जानकारी” बताकर छिपाए जाने से अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या वन विभाग में फर्जी चौकीदारों (मस्टर रोल घोटाले) का खेल चल रहा है?

वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि, प्रथम अपील की तैयारी

इस विवादित पत्र की प्रतिलिपि वनमंडल अधिकारी (DFO) जबलपुर और उप वनमंडल अधिकारी (SDO) सिहोरा को भी सूचनार्थ भेजी गई है।

अपीलकर्ता का कहना है कि शासकीय पदों पर हुई नियुक्तियां और सरकारी खजाने से दिया जाने वाला मानदेय कोई “व्यक्तिगत जानकारी” नहीं है, बल्कि यह जनहित और पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा है। सिहोरा वन विभाग के इस टालमटोल वाले रवैये के खिलाफ जल्द ही प्रथम अपीलीय अधिकारी/वनमंडल अधिकारी जबलपुर के समक्ष प्रथम अपील दायर की जाएगी।

संपादकीय टिप्पणी: क्या सरकारी खजाने से वेतन और मानदेय पाने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति व भुगतान प्रक्रिया की जानकारी छुपाना RTI अधिनियम की मूल भावना का स्पष्ट उल्लंघन नहीं है? अब देखना यह होगा कि जबलपुर वनमंडल के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले पर क्या संज्ञान लेते हैं।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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