स्वास्थ्य व्यवस्था या विवादों का अखाड़ा? मझौली CHC में महिला स्टाफ के बीच हाईवोल्टेज ड्रामा; अब दागदार पृष्ठभूमि वाले अधिकारी को सौंपी जांच!

सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज हो न हो, लेकिन स्टाफ के बीच ‘गैंगवार’ और गुंडागर्दी चरम पर है।

 

मझौली (जबलपुर)

जबलपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मझौली में गत 24 जून को दो महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों—ANM कल्पना राय (चनगवां) और CHO अनुराधा चक्रवर्ती (दर्शनी)—के बीच अस्पताल परिसर के भीतर ही जमकर गाली-गलौज, मारपीट का प्रयास और जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

इस घटना के बाद मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी (CBMO) द्वारा आनन-फानन में एक जांच समिति का गठन तो कर दिया गया, लेकिन अब इस जांच समिति के गठन पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रक्षक ही भक्षक: क्या थे आरोप?

 ANM कल्पना राय का आरोप: बैठक के बाद CHO अनुराधा चक्रवर्ती ने उनका पीछा किया, सरेआम गाली-गलौज की, जान से मारने की धमकी दी और वॉट्सऐप ग्रुप पर अपमानजनक टिप्पणियां कीं।

 CHO अनुराधा चक्रवर्ती का आरोप: ANM कल्पना राय ने स्टाफ के सामने उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई, गाली-गलौज की और उन पर शारीरिक हमला (हाथापाई) करने का प्रयास किया, जिससे दफ्तर में असुरक्षित माहौल बन गया।

यह पूरी घटना मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 और नियम 7 (शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय आचरण) का खुला उल्लंघन है।

बड़ा सवाल: दागदार को ही बना दिया ‘न्यायाधीश’?

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी ने जांच आदेश (क्रमांक 5/एन.एच.एम./2026-27/508) जारी करते हुए श्री अमित चंद्रा (BPM, CHC मझौली) को इस तीन सदस्यीय जांच समिति का सदस्य सचिव नियुक्त कर दिया।

*सूत्रों और स्थानीय दावों के अनुसार, जिस अधिकारी (अमित चंद्रा) को निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा गया है, वे खुद विवादित पृष्ठभूमि के हैं, उन पर पहले से केस चल रहे हैं और FIR तक दर्ज है। जो व्यक्ति खुद कानूनी झमेलों और लड़ाई-झगड़ों में फंसा हो, उसे इतनी संवेदनशील विभागीय जांच का सचिव बनाना प्रशासनिक समझ और नीयत पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।**

आदेश की कॉपी में ‘सफेद झूठ’ या लापरवाही?

आदेश के पृष्ठ क्रमांक 1 के नोट में बकायदा लिखा गया है कि: *”समिति के किसी भी सदस्य का किसी भी पक्ष के साथ कोई पूर्व विवाद या हितों का टकराव नहीं है… इसकी पुष्टि की गई है।”*

अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को अपने ही अधिकारियों के मुकदमों और FIR की जानकारी नहीं है? या फिर जानबूझकर अपनों को बचाने और मामले को रफा-दफा करने के लिए ऐसे विवादित व्यक्ति को जांच की कमान सौंपी गई है? जब जांच करने वाले की खुद की छवि साफ नहीं है, तो पीड़ित महिला कर्मचारियों को ‘नैसर्गिक न्याय’ कैसे मिलेगा?

उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग

एक तरफ प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने का दावा करती है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल परिसर जंग का मैदान बन चुके हैं और जांच के नाम पर अपनों को उपकृत किया जा रहा है। क्षेत्र की जनता और जागरूक नागरिकों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) जिला जबलपुर से मांग की है कि इस पूरी जांच समिति का पुनर्गठन किया जाए और दागी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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