कलेक्टर हो तो ऐसा!”— जबलपुर कलेक्ट्रेट में मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह का एक अलग ही रूप सामने आया।

 लाचार और बेबस श्रमिकों की आपबीती सुनते ही कलेक्टर साहब न केवल तुरंत ‘एक्शन मोड’ में आ गए, बल्कि उन्होंने गरीबों के हक की इस लड़ाई को सीधे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया

जबलपुर

दरअसल, उमरिया जिले के 25 आदिवासी श्रमिक अपने परिवार और छोटे-छोटे बच्चों के साथ वन विभाग के बीट गार्ड द्वारा रोकी गई मजदूरी की गुहार लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। कड़ी धूप में परेशान इन ग्रामीणों की आंखों में बेबसी साफ दिख रही थी। जैसे ही यह मामला कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के संज्ञान में आया, कलेक्ट्रेट का माहौल पूरी तरह बदल गया।

 तुरंत लिया एक्शन, अधिकारियों को किया तलब

कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना एक पल गंवाए ‘सिंघम’ अवतार अख्तियार कर लिया। उन्होंने तत्काल सहायक श्रम आयुक्त को अपने कक्ष में तलब किया और वन विभाग के आला अधिकारियों को दो टूक लहजे में निर्देश दिए। कलेक्टर की सख्ती ऐसी थी कि उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक इन गरीबों को उनकी खून-पसीने की कमाई का एक-एक पैसा नहीं मिल जाता, तब तक जिम्मेदार अधिकारी कलेक्ट्रेट से हिल नहीं सकेंगे।

 सख्ती के साथ दिखी संवेदनशीलता की मिसाल

एक तरफ जहां दोषी अमले पर कलेक्टर का गुस्सा फूट रहा था, वहीं दूसरी तरफ इन गरीब परिवारों के लिए उनका संवेदनशील दिल भी सामने आया। दोपहर से भूखे-प्यासे बैठे श्रमिकों और उनके मासूम बच्चों को देखकर कलेक्टर ने तुरंत अधिकारियों को आदेश देकर शहर के मशहूर ‘इंडियन कॉफी हाउस’ से गरमा-गरम भोजन मंगवाया। कलेक्टर की मौजूदगी में सभी श्रमिकों और बच्चों को कलेक्ट्रेट परिसर में ही ससम्मान भोजन कराया गया।

 प्रशासनिक हड़कंप और चंद घंटों में न्याय

कलेक्टर के इस कड़े रुख को देखकर श्रम और वन विभाग के अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में कागजी कार्रवाई पूरी की गई और मौके पर ही श्रमिकों की 3 लाख 86 हजार रुपये की बकाया मजदूरी का भुगतान कराया गया। इतना ही नहीं, रात होने पर कलेक्टर के निर्देश पर अधिकारियों ने विशेष बस का इंतजाम किया और सभी श्रमिकों को सुरक्षित उनके गृह जिले उमरिया के लिए रवाना किया।

कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह के इस त्वरित न्याय और मानवीय दृष्टिकोण की अब पूरे प्रदेश में सराहना हो रही है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि अगर प्रशासनिक मुखिया संवेदनशील और दृढ़ हो, तो भ्रष्ट तंत्र को घुटने टेकने में चंद घंटे भी नहीं लगते।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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