आए दिन व्यावसायिक इमारतों और दुकानों में होने वाले भीषण अग्निकांडों पर अंकुश लगाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
भोपाल/जबलपुर
किसी भी भवन में प्रवेश करने से पहले अब हर नागरिक को यह जानने का पूरा हक होगा कि वह इमारत आग से सुरक्षित है या नहीं। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1958′ के तहत अग्नि सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने हेतु नए और कड़े प्रारूप नियम (Draft Rules) जारी कर दिए हैं।
इस नए कानून के तहत अब मनमानी नहीं चलेगी और हर छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान को कड़े सुरक्षा मानकों से गुजरना होगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब भ्रष्टाचार और लापरवाही पर रोक लगाने के लिए हर भवन की फायर ऑडिट रिपोर्ट को ऑनलाइन सार्वजनिक (Public Domain) किया जाएगा, जिसे कोई भी आम नागरिक पोर्टल पर देख सकेगा।
क्या है नए नियमों में खास? (इन पैमानों पर कसी जाएगी नकेल)
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और श्रम एवं रोजगार मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के नेतृत्व में तैयार किए गए इन प्रारूप नियमों में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया गया है:
आपातकालीन निकास (Emergency Exits): हर स्थापना में आपातकाल के समय बाहर निकलने के लिए सुरक्षित और स्पष्ट निकासी व्यवस्था का होना अनिवार्य होगा।
विद्युत सुरक्षा (Electrical Safety): शॉर्ट सर्किट से होने वाले हादसों को रोकने के लिए समय-समय पर वायरिंग की जांच और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।
ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण: खतरनाक और जल्दी आग पकड़ने वाले रसायनों या सामग्रियों के रख-रखाव के लिए विशेष गाइडलाइन तय की गई है।
ट्रेनिंग और रिस्पांसिबिलिटी: दुकान और संस्थानों के कर्मचारियों को आग बुझाने का प्रशिक्षण (Training) देना अनिवार्य होगा और जवाबदेही तय की जाएगी।
हाई-रिस्क बिल्डिंग्स के लिए कड़े नियम: मॉल, मल्टीप्लेक्स और बड़ी व्यावसायिक स्थापनाओं (High-Risk Establishments) के लिए विशेष और अत्यंत कड़े प्रावधान लागू किए जा रहे हैं।
जनता के हाथ में होगी ताकत: ‘फायर ऑडिट’ होगा ऑनलाइन
अब तक कई बड़े भवनों में फायर एनओसी (NOC) खेल कागजों तक ही सीमित रहता था। लेकिन नए नियमों के अनुसार, भवनों की **फायर ऑडिट रिपोर्ट को विभागीय पोर्टल पर सार्वजनिक** किया जाएगा। इससे जनता को यह पता रहेगा कि जिस मॉल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर या दुकान में वे जा रहे हैं, वह सुरक्षित है या मौत का कुआं।
आम जनता, व्यापारियों और प्रबुद्ध जनों से मांगे गए सुझाव व आपत्तियां
सरकार ने इन नियमों को पूरी तरह लागू करने से पहले लोकतंत्र की भावना का सम्मान करते हुए आम जनता और व्यापारिक संगठनों से उनके सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। यदि आपके पास मझौली या जबलपुर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और जमीनी हकीकत को देखते हुए कोई सुझाव है, तो आप उसे सीधे ईमेल के माध्यम से सरकार तक पहुंचा सकते हैं।
सुझाव भेजने के लिए आधिकारिक ईमेल आईडी:
1. dicbhopal@gmail.com
2. dihsindore@mp.gov.in
मझौली दर्पण न्यूज़ की नजर: जमीनी स्तर पर पालन बेहद जरूरी
नियम बनना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन मझौली जैसे अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां तंग गलियां हैं और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना पुख्ता सुरक्षा के चल रहे हैं, वहां इसका जमीनी क्रियान्वयन (Implementation) सबसे बड़ी चुनौती होगी। मझौली दर्पण न्यूज़ सभी स्थानीय व्यापारियों और जागरूक नागरिकों से अपील करता है कि इन प्रारूप नियमों का अध्ययन करें और अपने अमूल्य सुझाव सरकार को अवश्य भेजें, ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी अप्रिय हादसे से हमारे अपनों को बचाया जा सके।
ब्यूरो रिपोर्ट, मझौली दर्पण न्यूज़
(सजग पत्रकारिता, सुरक्षित समाज)




