सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्रशासन से जानकारी मांगना और जवाब न मिलना अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है।
जबलपुर
“मध्यप्रदेश में माझी कौन?” जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जानकारी न मिलने के कारण आज न्यायालय अपर कलेक्टर एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष सुनवाई हुई, जिसमें अपीलार्थी ने उपस्थित होकर अपना पक्ष मजबूती से रखा।
नरसिंहपुर निवासी अमर सिंह नौरिया ने आज कलेक्ट्रेट कार्यालय, जबलपुर स्थित अपर कलेक्टर न्यायालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने लोक सूचना अधिकारी द्वारा जानकारी न दिए जाने के विरुद्ध अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि शासन की लोक कल्याणकारी योजनाओं और पहचान से जुड़े इस विषय पर पारदर्शिता कितनी आवश्यक है।
अपीलार्थी ने 14 फरवरी 2026 को कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर “मध्यप्रदेश में माझी कौन?” के संबंध में आधिकारिक जानकारी मांगी थी। जब लोक सूचना अधिकारी ने निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं दिया, तो आवेदक ने RTI अधिनियम की धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील दायर की।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर कलेक्टर ने लोक सूचना अधिकारी को नोटिस जारी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। आज हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों की स्थिति का अवलोकन किया।
“मध्यप्रदेश में माझी कौन?” – यह प्रश्न केवल एक आरटीआई आवेदन नहीं है, बल्कि यह कई सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं से जुड़ा विषय है। जानकारी छिपाने या विलंब करने की प्रवृत्ति पर न्यायालय का यह कड़ा रुख प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
इस मामले की आगामी कार्यवाही और लोक सूचना अधिकारी के प्रतिवेदन पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, जबलपुर (म.प्र.)




