नगर परिषद मझौली में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है।
मझौली (जबलपुर)
नगर परिषद अधिकारियों की कार्यप्रणाली और पुलिस प्रशासन की अनदेखी के चलते मझौली का ‘बाजार प्लाट’ क्षेत्र वर्तमान में दुर्घटनाओं का केंद्र बन चुका है। आलम यह है कि नियमों को ताक पर रखकर यहाँ बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े किए जा रहे हैं, जिससे आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन शायद किसी बड़ी जनहानि या वीभत्स घटना का इंतजार कर रहा है।
हैरानी की बात यह है कि बाजार प्लाट में यह अराजकता पुलिस थाने के मुख्य गेट के ठीक सामने हो रही है। पुलिसकर्मी रोजाना अपनी आंखों के सामने ट्रैफिक नियमों को टूटते देखते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधी गई है।
स्थानीय जनता में नगर परिषद सीएमओ नीतू सिंह के खिलाफ भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि: अधिकारी अपने कार्यालय से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखना मुनासिब नहीं समझते।
जनता की शिकायतों और समस्याओं को लगातार अनसुना किया जा रहा है।
बाजार प्लाट में हो रहे अतिक्रमण और पार्किंग की समस्या पर नगर परिषद ने पूरी तरह से आंखें मूंद ली हैं।
अवैध बस स्टॉप:शासन ने बसों के लिए व्यवस्थित बस स्टैंड का निर्माण कराया है, लेकिन इसके बावजूद बसें बाजार प्लाट के बीचों-बीच खड़ी होकर सवारियां भर रही हैं।
नगर परिषद की नाकामी: नगर परिषद की सुस्ती के कारण बस स्टैंड का उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रहती है।
क्षेत्र की इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय निवासियों ने कलेक्टर जबलपुर, मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश और पुलिस कमिश्नर से हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही क्षेत्रीय विधायक अजय विश्नोई से भी इस अव्यवस्था पर संज्ञान लेने की अपील की गई है।
मझौली की जनता इस समय खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। एक तरफ पुलिस की निष्क्रियता और दूसरी तरफ नगर परिषद की प्रशासनिक विफलता ने शहर की यातायात व्यवस्था को आईसीयू में डाल दिया है। यदि समय रहते बसों को स्टैंड पर शिफ्ट नहीं किया गया और बाजार प्लाट से अवैध पार्किंग नहीं हटाई गई, तो भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।




