एक ओर मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश भर में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ चलाकर जल स्रोतों के संरक्षण और स्वच्छता का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद मझौली में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है
मझौली जबलपुर
।नगर के मुख्य मार्गों और वार्डों की सड़कों पर बहता नालियों का गंदा पानी न केवल सरकारी दावों की पोल खोल रहा है, बल्कि आम जनता के लिए भी मुसीबत का सबब बना हुआ है।
नगर के कई हिस्सों में नालियां चोक होने के कारण गंदा और बदबूदार पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। स्थिति इतनी विकट है कि पैदल चलने वाले राहगीरों, विशेषकर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को इस गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि लंबे समय से नालियों की सफाई न होने के कारण अब यह गंदा पानी सड़कों पर सैलाब की तरह बहने लगा है।
भीषण गर्मी और धूप के बीच सड़कों पर जमा यह गंदा पानी संक्रामक बीमारियों को दावत दे रहा है। क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और बदबू के कारण आसपास के दुकानदारों और रहवासियों का जीना मुहाल हो गया है। प्रशासन की इस अनदेखी से स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
वर्तमान में शासन द्वारा जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत बड़े-बड़े आयोजन किए जा रहे हैं। लेकिन मझौली की सड़कों पर बहती गंदगी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या प्रशासन का ध्यान केवल कागजी खानापूर्ति और फोटो खिंचवाने तक सीमित है? स्वच्छता को लेकर किए जा रहे दावों के बीच मुख्य मार्गों की यह हालत नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है।
नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस समस्या का स्थायी निराकरण किया जाए। यदि जल्द ही नालियों की सफाई और गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो क्षेत्र में महामारी फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।




