मध्यप्रदेश की ‘संस्कारधानी’ जबलपुर से अनुशासन और राजनीति के टकराव का एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है।
जबलपुर
शहर को स्मार्ट बनाने की जिम्मेदारी संभाल रहे IAS अधिकारी और स्मार्ट सिटी CEO अरविंद शाह को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी गई है। यह घटना उस समय हुई जब अधिकारी ने सरकारी काम में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर सख्ती दिखाई थी।
क्या है पूरा मामला?
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में गति लाने के लिए CEO अरविंद शाह पिछले कुछ समय से कड़े फैसले ले रहे थे। इसी कड़ी में उन्होंने कुछ लापरवाह कर्मचारियों का वेतन (Salary) रोकने के निर्देश दिए थे।
चर्चा है कि इस प्रशासनिक कार्रवाई से नाराज होकर एक कर्मचारी ने राजनीतिक रसूख का सहारा लिया। इसके बाद IAS अरविंद शाह को कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह के बंगले पर बुलाया गया। आरोप है कि वहां मौजूद कुछ लोगों ने अधिकारी के साथ न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि खुलेआम यह धमकी दी कि:
अधिकारियों में आक्रोश, सरकार की साख पर सवाल
इस घटना के बाद से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। एक ईमानदार अधिकारी को उसके कर्तव्य निर्वहन के बदले मिली इस धमकी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
अधिकारियों का मनोबल: अगर जिले के शीर्ष अधिकारियों के साथ सत्ता के गलियारों में ऐसा व्यवहार होगा, तो वे बिना दबाव के काम कैसे कर पाएंगे?
अनुशासन बनाम राजनीति: क्या काम में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
सुरक्षा की चिंता: खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे IAS अरविंद शाह ने इस मामले की जानकारी अपने वरिष्ठों को दे दी है।
यह विवाद अब केवल एक कर्मचारी और अधिकारी के बीच का नहीं रहा, बल्कि सरकार की साख और ब्यूरोक्रेसी के मनोबल के बीच की जंग बन गया है। एक तरफ सरकार प्रदेश में सुशासन (Good Governance) का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर कैबिनेट मंत्री के बंगले से ऐसी खबरें आना विपक्ष को भी हमलावर होने का मौका दे सकती हैं।
नोट: इस मामले में अब तक मंत्री कार्यालय या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक लिखित बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा आग की तरह फैल चुकी है।
क्या आपको लगता है कि इस तरह के राजनीतिक दबाव से शहर के विकास कार्योंपर असर पड़ेगा?




