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Thursday, February 26, 2026

1.27 करोड़ का जलघोटाला? पटोरी प्यासा, पंचायत–विभाग एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

कटनी जिले के बहोरीबंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पटोरी में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना करोड़ों खर्च के बावजूद पूरी तरह फेल साबित हो रही है।

कटनी बाकल

1 करोड़ 27 लाख रुपये की लागत से बनी योजना आज जमीनी हकीकत में लोहे-सीमेंट का ढांचा बनकर रह गई है जबकि ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। सवाल सीधा है—इतनी बड़ी रकम आखिर गई कहां?

करीब 1100 की आबादी वाले गांव में योजना स्वीकृत हुई, पाइपलाइन और टंकी के फोटो खिंचे, फाइलें पूरी हुईं—लेकिन घर-घर पानी आज तक नहीं पहुंचा।

ग्रामीणों का आरोप है कि हर परिवार से 500 रुपये वसूले गए आधार कार्ड जमा कराए गए, जबकि पाइपलाइन आधे गांव में भी नहीं डाली गई।

यह सवाल उठना लाज़िमी है कि जब काम अधूरा था तो भुगतान और एनओसी किस आधार पर दी गई?

ग्रामीण गेंदालाल चौधरी का आरोप है कि मानसून के दौरान ठेकेदार को आंख मूंदकर एनओसी दे दी गई, लेकिन आज बोरवेल सूखे पड़े हैं।राजाराम पटेल* का कहना है कि जब पंचायत सचिव और रोजगार सहायक से जवाब मांगा गया तो कहा गया— जहां शिकायत करना है कर दो।”

यह कथन प्रशासनिक संवेदनहीनता नहीं तो और क्या है?

जलसंकट से त्रस्त महिलाएं खाली डिब्बे-बर्तन लेकर पंचायत भवन पहुंचीं, घंटों घेराव किया, बहस हुई—लेकिन पानी नहीं मिला

सरपंच प्रतिनिधि गोकुल जलसा बाई पटेल के साथ हुई तीखी बहस ने यह साफ कर दिया कि गांव में भरोसा पूरी तरह टूट चुका है

पंचायत कहती है—पानी नहीं, विभाग कहता है—हम जिम्मेदार नहीं

पंचायत सचिव दालचंद झारिया ने स्वीकार किया कि ग्रामीणों की मांग जायज है, लेकिन कह दिया कि जलस्तर 400–600 फीट नीचे चला गया है।

उधर पीएचई विभाग के सब इंजीनियर अनिल चमुलके ने साफ शब्दों में कहा कि योजना पंचायत को सौंप दी गई है, अब समस्या पंचायत देखे।यानी करोड़ों की योजना लावारिस, और जिम्मेदारी फाइलों में घूम रही है।

स्थायी समाधान क्यों नहीं? हर साल वही बहाना

बाकल, मझगवा, पटोरी, इमलिया जैसे पठारी इलाकों में हर साल जलसंकट गहराता है, यह प्रशासन को नया नहीं है। फिर भी न वैकल्पिक जलस्रोत विकसित किए गए, न रिचार्ज व्यवस्था  न ही गर्मी से पहले कोई तैयारी।

क्या नल-जल योजना सिर्फ आंकड़ों और रिपोर्टों के लिए थी?

ग्रामीण राकेश पटेल, संतोष पटेल, मुरारी लाल, रामदास सेन, अबीरचंद चौधरी, भूपेंद्र पटेल सहित सैकड़ों लोगों ने चेतावनी दी है कि

यदि शीघ्र जलापूर्ति बहाल नहीं हुई, दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और खर्च की जांच नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

* अधूरी योजना पर पूरा भुगतान किसने कराया?

* ठेकेदार, पंचायत और विभाग—तीनों में जिम्मेदार कौन?

* 500 रुपये की वसूली किस आदेश से की गई?

* योजना सौंपते समय तकनीकी जांच क्यों नहीं हुई?

अब यह मामला सिर्फ पानी का नहीं, सार्वजनिक धन की जवाबदेही का बन चुका है।

यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो पटोरी का यह जलसंकट आंदोलन में बदलना तय है—और इसकी पूरी जिम्मेदारी जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर होगी।

सुंदरलाल बर्मन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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