गोबर, गौमूत्र और कैंसर रिसर्च के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का सनसनीखेज मामला जबलपुर की एक यूनिवर्सिटी से सामने आया है।
जबलपुर
जांच में खुलासा हुआ है कि लगभग 3.5 करोड़ रुपये की सरकारी राशि में से करोड़ों रुपये का गलत इस्तेमाल किया गया। रिसर्च के बजाय पैसा हवाई यात्राओं, लग्जरी गाड़ियों, होटल खर्च और संदिग्ध बिलों में उड़ाया गया, जिससे पूरे शैक्षणिक और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह राशि गोबर–गौमूत्र के औषधीय उपयोग और कैंसर रिसर्च जैसे संवेदनशील विषयों के नाम पर स्वीकृत की गई थी। लेकिन वास्तविकता यह सामने आई है कि मैदानी शोध, लैब परीक्षण और वैज्ञानिक परिणामों की जगह कागजी रिपोर्टें और फर्जी खर्च दिखाए गए। कई ऐसे बिल सामने आए हैं जिनका रिसर्च से कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया।
हवाई सफर, गाड़ियां और फर्जी बिल
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि रिसर्च प्रोजेक्ट के नाम पर बार-बार हवाई यात्राएं, महंगी गाड़ियों का उपयोग और अन्य गैर-जरूरी मदों में भुगतान किया गया। कुछ मामलों में खर्च की स्वीकृति और उपयोग के बीच भारी अंतर पाया गया है, जिससे आर्थिक अनियमितताओं की पुष्टि होती है।
कैंसर जैसे गंभीर विषय पर सवाल
सबसे गंभीर पहलू यह है कि कैंसर जैसे जानलेवा रोग के नाम पर यह पूरा प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी राशि का वास्तविक वैज्ञानिक उपयोग होता, तो इसके ठोस शोध परिणाम सामने आने चाहिए थे। लेकिन अब तक न तो उल्लेखनीय रिसर्च आउटपुट दिखा है और न ही कोई प्रभावी वैज्ञानिक निष्कर्ष सार्वजनिक किए गए हैं।
जांच के घेरे में यूनिवर्सिटी प्रबंधन
मामला उजागर होने के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। यह पूछा जा रहा है कि बिना प्रभावी मॉनिटरिंग और ऑडिट के इतनी बड़ी राशि कैसे खर्च हो गई? वहीं, शासन स्तर पर भी फाइलों की जांच तेज कर दी गई है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।
कार्रवाई की मांग तेज
शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों से राशि की वसूली हो और उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं। उनका कहना है कि रिसर्च के नाम पर ऐसे घोटाले न केवल सरकारी धन की बर्बादी हैं, बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी धोखा हैं।
अब सवाल यह है कि क्या इस घोटाले में शामिल जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, जबलपुर की यह यूनिवर्सिटी गोबर–गौमूत्र रिसर्च से ज्यादा घोटाले की वजह से चर्चा में आ गई है।




