21 साल पहले बाढ़ ने उजाड़ा, अब तीन पंचायतों की सीमा उलझन ने छीनी सड़क: करिया पीपर में दलदल से गुजरने को मजबूर 200 जिंदगियां

आजादी के अमृतकाल और विकास के तमाम प्रशासनिक दावों के बीच पथरिया विधानसभा (क्षेत्र क्रमांक 54) का ग्राम करिया पीपर (खैजरा हार) आज भी बदहाली और उपेक्षा का दंश झेल रहा है।

दमोह/बटियागढ़

वर्ष 2005 में सुनार नदी की प्रलयंकारी बाढ़ में उजड़ने के 21 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां के बाशिंदों को एक पक्की सड़क तक नसीब नहीं हो सकी है। विडंबना यह है कि करीब 200 की आबादी वाला यह रैकवार बाहुल्य गांव तीन-तीन ग्राम पंचायतों—मंगोला, बेलापुरवा और बेली की सीमा रेखा में उलझकर बुनियादी विकास से कोसों दूर खड़ा है।

2005 की त्रासदी: पेड़ों पर गुजारी थीं रातें, आज दलदल में कट रही जिंदगी

वर्ष 2005 की भीषण बाढ़ को याद कर आज भी ग्रामीणों की आंखें भर आती हैं। सुनार नदी के उफान ने पूरे गांव को जलमग्न कर दिया था। कच्चे-पक्के मकान जमींदोज हो गए थे, गृहस्थी, अनाज और पशुधन सब तबाह हो गया था। जान बचाने के लिए लोगों को पेड़ों और अन्य गांवों में शरण लेनी पड़ी थी। इस आपदा के बाद विस्थापित होकर ग्रामीणों ने नदी से दूर खेतों और ऊंचे स्थानों पर नए आशियाने बनाए। लेकिन 21 साल बाद भी प्रशासनिक संवेदनहीनता का आलम यह है कि इस बस्ती को मुख्य मार्ग से जोड़ने की सुध किसी ने नहीं ली।

तीन पंचायतों का सीमा विवाद: 2.5 किमी सड़क के लिए तरस रहे ग्रामीण

करिया पीपर से मुख्य पक्के मार्ग (मंगोला की ओर) की दूरी करीब 2.5 से 4 किलोमीटर है। यह पहुंच मार्ग मंगोला, बेलापुरवा और बेली ग्राम पंचायतों की सीमा से होकर गुजरता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित पंचायतें आपसी सामंजस्य बनाकर अपने-अपने हिस्से (सवा-सवा किलोमीटर) का मुरुमीकरण या सी.सी. निर्माण करा दें, तो समस्या का तत्काल समाधान हो सकता है। परंतु पंचायतों के आपसी तालमेल के अभाव और उपेक्षा के कारण यह मार्ग आज तक कच्चा और बदहाल पड़ा है।

सड़क न होने से जिंदगी पर चौतरफा संकट

 * शिक्षा पर ताला: बारिश के दिनों में कच्चा रास्ता दलदल बन जाता है। स्कूली छात्र-छात्राओं को रोजाना जान जोखिम में डालकर गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।

 * स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी: गांव में चारपहिया वाहन या एंबुलेंस का पहुंचना नामुमकिन है। आपातकाल या प्रसव के समय मरीजों को खाट (डोली) पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।

 * सामाजिक बहिष्कार जैसी स्थिति: रास्ता खराब होने के कारण गांव में रिश्तेदार आने से कतराते हैं। हालात यह हैं कि गांव के युवक-युवतियों के विवाह संबंध तय होने में भारी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।

जनसुनवाई से सीएम हेल्पलाइन तक अर्जी, पर नतीजा सिफर

ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए पंचायत से लेकर भोपाल तक अपनी आवाज पहुंचाई है। सीएम हेल्पलाइन (शिकायत क्रमांक: 28345519) दर्ज कराने के अलावा कलेक्टर जनसुनवाई में 06/08/2024, 13/08/2026 और 29/08/2026 को लिखित आवेदन दिए गए। हाल ही में मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत भी प्रशासन से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं।

प्रशासनिक इच्छाशक्ति दिखे तो खत्म हो 21 साल का वनवास

ग्रामीण मीनेश रैकवार, कृष्णा रैकवार, कनई रैकवार, मुन्नी प्रसाद, साधन, सुबोध, नारायण, भगवानदास, लखन, इमरत, सीताराम, पर्वत और परम सहित समस्त ग्रामवासियों ने जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से दो टूक मांग की है कि सीमा विवाद का तकनीकी पेच सुलझाकर तीनों पंचायतों को संयुक्त रूप से सड़क निर्माण के स्पष्ट निर्देश दिए जाएं, ताकि करिया पीपर के निवासियों को इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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