जांच दल की संदिग्ध भूमिका पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, भ्रष्टाचारियों को बचाने के आरोप में कलेक्टर जनसुनवाई में खुली पोल

जनपद सदस्य पति के कथित जीएसटी घोटाले की जांच में लीपापोती, 3 से 4 बार टाली गई औपचारिक कार्रवाई

 * जांच अधिकारी पुष्पराज सिंह, राजेंद्र कापसे और प्रमोद पांडेय पर सांठगांठ व नोटिस न देने का सीधा आरोप

 * कलेक्ट्रेट से पावती क्रमांक 34 जारी: जिला पंचायत सीईओ को 30 दिवस में निष्पक्ष निराकरण का अल्टीमेटम

जबलपुर / मझोली:

जनपद पंचायत मझोली अंतर्गत ग्राम पंचायत इन्द्राना में सामने आया कथित वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग का मामला अब व्यापक प्रशासनिक गतिरोध का रूप ले चुका है। जनपद सदस्य श्रीमती सीमा मनोज तिवारी के पति श्री मनोज तिवारी पर लगे कथित जीएसटी घोटाले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय जिम्मेदार जांच दल द्वारा फाइलों को दबाने और रसूखदारों को खुला संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगा है। जांच के नाम पर लगातार हो रही हीलाहवाली और टालमटोली से आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार को जबलपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर जनसुनवाई में जांच दल के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया।

जिला पंचायत के आदेशों को ठेंगा, चार बार टाली गई जांच प्रक्रिया

शिकायतकर्ता सुरेश बर्मन एवं अभय पांडेय सहित इन्द्राना के ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर बताया कि इस पूरे मामले की पहली औपचारिक शिकायत 18 अगस्त 2026 को जनसुनवाई के माध्यम से प्रेषित की गई थी। इसके बाद जिला पंचायत जबलपुर ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश पारित किए थे।

इस जांच का जिम्मा तीन सदस्यीय दल—पुष्पराज सिंह, राजेंद्र कापसे एवं प्रमोद पांडेय को सौंपा गया था। शिकायतकर्ताओं का सीधा आरोप है कि जांच दल ने मौके पर जाकर वस्तुस्थिति परखने और साक्ष्य संकलित करने के बजाय पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने का काम किया। जांच की तिथियां 3 से 4 बार बदली गईं और महीनों का समय बीत जाने के बाद भी न तो आरोपी पक्ष को कोई वैधानिक नोटिस थमाया गया और न ही कोई विधिक कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

‘फाइल दबाकर अनैतिक कृत्यों को दिया जा रहा खुला संरक्षण’

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और कलेक्टर को सौंपे गए शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जांच दल का यह ढुलमुल और पक्षपातपूर्ण रवैया साफ दर्शाता है कि कथित घोटाले पर पर्दा डालने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा बरती जा रही इस संदिग्ध कार्यप्रणाली से क्षेत्र में रोष गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जांच में की जा रही अनावश्यक देरी से गलत और अनैतिक गतिविधियों को प्रशासनिक स्तर से परोक्ष हवा मिल रही है। ग्रामीणों ने पुरजोर मांग की है कि मामले को जिला पंचायत के उच्चाधिकारी सीधे अपने संरक्षण में लें और जांच दल की संदेहास्पद भूमिका की भी पृथक जांच कराते हुए निष्पक्ष व स्वतंत्र रिपोर्ट तैयार की जाए।

टोकन नंबर 34 पर दर्ज हुआ मामला, 30 दिन की प्रशासनिक समय-सीमा तय

मंगलवार, 06 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर जनसुनवाई में प्रस्तुत इस शिकायत को कंप्यूटर कोड संख्या 776378/159/08, रसीद क्रमांक 159/08 और पावती क्रमांक 34 के तहत विधिवत दर्ज कर लिया गया है। कलेक्ट्रेट स्तर से मामले की फाइल को तुरंत निराकरण हेतु जिला पंचायत विभाग को अंतरित किया गया है, जिसके लिए शासन द्वारा 30 दिवस की स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है।

शिकायतकर्ताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इस निर्धारित 30 दिनों के भीतर जांच दल की हीलाहवाली खत्म कर पारदर्शी और ठोस वैधानिक कदम नहीं उठाए गए, तो वे एक माह बाद कलेक्ट्रेट की समीक्षा जनसुनवाई में उपस्थित होकर सीधे कलेक्टर के समक्ष पूरे तंत्र की पोल खोलेंगे और वृहद स्तर पर न्याय की मांग करेंगे।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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