मझौली CHC में स्वास्थ्य व्यवस्था का ‘जनाजा’: वायरल फीवर के बीच डॉक्टर नदारद, महज एक चिकित्सक के भरोसे हजारों मरीजों की सांसें

तपती धूप, उमस और बदलते मौसम के बीच मझौली अंचल में वायरल फीवर ने विकराल रूप धारण कर लिया है।

मझौली/जबलपुर

गाँव-गाँव से बच्चे, बुजुर्ग और युवा तेज बुखार, उल्टी-दस्त और बदन दर्द की शिकायत लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मझौली की चौखट तक पहुँच रहे हैं। लेकिन, अफसोस! इस ‘जीवनदायिनी’ अस्पताल की चौखट पर उन्हें इलाज नहीं, सिर्फ मायूसी और लंबी लाइनों में तड़पना मिल रहा है। प्रशासन की अनदेखी के चलते यहाँ स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।

मरीजों का हुजूम, ओपीडी खाली

मौसम की मार के चलते ओपीडी (OPD) में मरीजों की संख्या सामान्य से दोगुनी हो गई है। हालात यह हैं कि सुबह तो जैसे-तैसे पर्चियां कट जाती हैं, लेकिन दोपहर ढलते ही अस्पताल के कमरों में सन्नाटा पसर जाता है।

 अस्पताल में कोहराम: दूर-दराज के गाँवों से किराया खर्च कर पहुँचने वाले गरीब मरीज घंटों बेंच और फर्श पर बैठकर डॉक्टरों का इंतजार करते हैं, लेकिन उन्हें देखने वाला कोई नहीं होता।

 बेहाल मरीज: दर्द से कराहते मरीज और उन्हें संभालने वाले परिजन बदइंतजामी के कारण स्वास्थ्य विभाग को कोसने को मजबूर हैं।

इमरजेंसी भी अब ‘राम भरोसे’

अस्पताल की हालत इतनी बदतर है कि आपातकालीन स्थिति (Emergency) में आने वाले गंभीर मरीजों को या तो नर्सों और वार्ड बॉय के भरोसे छोड़ दिया जाता है, या फिर बिना प्राथमिक उपचार के उन्हें जबलपुर रेफर कर दिया जाता है। रेफरल के नाम पर मरीजों की जान से जो खिलवाड़ हो रहा है, वह किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।

ग्रामीणों का दर्द: घर-घर में लोग बीमार हैं, पर अस्पताल जाने से डर लगता है। वहां डॉक्टर मिलते ही नहीं। शाम होते ही अस्पताल परिसर भूतिया बन जाता है। क्या गरीबों की जान की कोई कीमत नहीं?”

BMO का खुलासा: ‘एक डॉक्टर ही पूरी व्यवस्था का भार ढो रहा है’

अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के सवाल पर जब खंड चिकित्सा अधिकारी (प्रभारी BMO) मुकेश सोनी से बात की गई, तो सिस्टम की कड़वी सच्चाई सामने आई। उन्होंने स्वीकार किया कि स्थिति नियंत्रण से बाहर है।

प्रभारी BMO मुकेश सोनी का बयान:”सच यह है कि पूरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली वर्तमान में सिर्फ एक डॉक्टर के भरोसे संचालित हो रहा है। लगातार 24 घंटे की ड्यूटी और भारी ओपीडी के दबाव में एक डॉक्टर का स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है। संसाधनों की कमी और स्टाफ की पदस्थापना के लिए हमने वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार पत्राचार किया है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला है।”

प्रशासनिक चुप्पी पर उठ रहे सवाल

एक ब्लॉक मुख्यालय के अस्पताल को मात्र एक डॉक्टर के भरोसे छोड़ देना, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाता है। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

क्षेत्रीय नागरिकों और जागरूक प्रबुद्धजनों ने जिला कलेक्टर और CMHO जबलपुर से तत्काल मांग की है कि:

 1. तत्काल पदस्थापना: सीएचसी मझौली में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए युद्धस्तर पर नए चिकित्सकों की पदस्थापना की जाए।

 2. जवाबदेही तय हो: ड्यूटी से नदारद रहने वाले चिकित्सा अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

 3. 24×7 सेवा: अस्पताल में चौबीस घंटे डॉक्टरों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए ताकि मरीजों को जबलपुर रेफर करने की नौबत न आए।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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