जनपद अध्यक्ष के गृह ग्राम दर्शनी में 1 महीने से नदारद सचिव; आदेश के 2 दिन बाद भी नहीं पहुंचे नए प्रभारी

 जनपद पंचायत अध्यक्ष विद्या दिनेश चौरसिया के अपने गांव में चरमराई पंचायत व्यवस्था

 * अस्वस्थ सचिव के हटने के बाद महगवां बम्होरी सचिव को सौंपा गया था प्रभार, अब तक ताला भी नहीं खुला

 * जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर राशन और पेंशन तक के काम ठप, रोज भटक रहे ग्रामीण

मझौली (जबलपुर)।

कहावत है—‘दिया तले अंधेरा’, यानी रोशनी बांटने वाले के अपने ही नीचे घोर स्याही पसरी होना। यह मुहावरा जनपद पंचायत मझौली की ग्राम पंचायत दर्शनी पर शत-प्रतिशत सटीक बैठ रहा है। समूची जनपद के विकास का नेतृत्व करने वाली जनपद अध्यक्ष श्रीमती विद्या दिनेश चौरसिया के खुद के गृह ग्राम में ही पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है। गांव की पंचायत में पिछले एक महीने से कोई सचिव मौजूद नहीं है। हद तो तब हो गई जब जिला पंचायत के आदेश को 48 घंटे से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी नए प्रभारी सचिव ने पंचायत भवन की चौखट तक नहीं देखी है।

आदेश को दो दिन बीते, प्रभारी सचिव ने नहीं ली सुध

ग्राम पंचायत दर्शनी के मूल सचिव श्री भीषम सिंह के अस्वस्थ होने के कारण जिला पंचायत जबलपुर के सीईओ अभिषेक गहलोत ने 28 अक्टूबर को आदेश जारी किया था। आदेश के तहत ग्राम पंचायत महगवां बम्होरी के सचिव श्री जीतेन्द्र यादव को दर्शनी का अतिरिक्त सचिवीय प्रभार सौंपा गया। लेकिन कागजी फरमान जारी होने के दो दिन बाद भी स्थिति जस की तस है। नए प्रभारी सचिव ने न तो कार्यभार संभाला और न ही गांव पहुंचकर ग्रामीणों की सुध ली।

एक माह से लटके काम, रोज बैरंग लौट रही जनता

ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व सचिव की बीमारी के चलते पिछले करीब एक महीने से पंचायत सचिव विहीन है। जनपद अध्यक्ष का गृह ग्राम होने के बावजूद यहां बुनियादी शासकीय सेवाएं दम तोड़ चुकी हैं। समग्र आईडी, ई-केवाईसी, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन पात्रता पर्ची, पेंशन सत्यापन और पीएम किसान सम्मान निधि जैसे जरूरी कामों के लिए ग्रामीण रोज पंचायत भवन के चक्कर काट रहे हैं। इसके साथ ही गांव के तमाम विकास एवं निर्माण कार्यों का मूल्यांकन व भुगतान भी अधर में लटका है।

मजदूरी छोड़ पंचायत पहुंचते हैं ग्रामीण, मिलता है सिर्फ ताला

गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और किसान रोज सुबह अपनी रोजी-रोटी और खेती-किसानी छोड़कर पंचायत भवन पहुंचते हैं कि शायद नया सचिव आ गया हो और उनका अटका काम निपट जाए। लेकिन घंटों इंतजार के बाद बंद ताले को देखकर उन्हें मायूस लौटना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब खुद जनपद अध्यक्ष के गांव में यह ‘अंधेरा’ पसरा है, तो फिर दूर-दराज की बाकी 90 से अधिक पंचायतों की बदहाली का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

ग्रामीणों ने जिला पंचायत सीईओ जबलपुर से मांग की है कि आदेश की अनदेखी करने वाले प्रभारी सचिव पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और दर्शनी पंचायत में नियमित सचिव की आमद सुनिश्चित कराकर जनता को इस परेशानी से निजात दिलाई जाए।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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