पर्व पर परिषद की नाकामी: मझौली में नल सूखे, त्योहार की खुशियों पर फिरा पानी

* ऐन त्योहार के वक्त नगर परिषद की नल-जल सप्लाई पूरी तरह ध्वस्त, नगरवासी बूंद-बूंद पानी को मोहताज

 * घरों में साफ-सफाई व पकवान की जगह बर्तनों की खनक, हैंडपंपों और निजी बोरवेलों पर लगीं लंबी कतारें

 * लापरवाही की हद: सप्लाई ठप होने के बाद भी वार्डों में नहीं पहुंचे टैंकर, जिम्मेदारों की खामोशी से फूटा जनता का गुस्सा

मझौली (जबलपुर)।

एक तरफ जहां पूरा नगर दीपोत्सव और आगामी पर्वों के उल्लास में डूबने की तैयारी कर रहा था, वहीं नगर परिषद मझौली के लचर और गैर-जिम्मेदाराना प्रबंधन ने आम जनता को भीषण जल संकट की आग में झोंक दिया है। त्योहार के ऐन वक्त पर नगर परिषद क्षेत्र की मुख्य जल प्रदाय व्यवस्था अचानक पूरी तरह ठप हो गई। नलों से पानी गायब होते ही नगर के विभिन्न वार्डों में हाहाकार मच गया है। आलम यह है कि पर्व के मौके पर जहां घरों में उल्लास होना चाहिए था, वहां लोग सिर पर डिब्बे, बाल्टियां और बर्तन लादकर पानी की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

पर्व की तैयारी छोड़कर पानी जुटाने की जद्दोजहद

दीपावली और लोकपर्वों के चलते इन दिनों हर घर में लिपाई-पुताई, व्यापक साफ-सफाई, दैनिक आवश्यकताएं और पकवान बनाने का दौर चल रहा है। सामान्य दिनों की तुलना में पर्व के दौरान पानी की खपत दोगुनी हो जाती है। लेकिन परिषद की विफलता का आलम यह रहा कि घरों के नल पूरी तरह सूखे पड़े हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक गृहणियों से लेकर बुजुर्ग और युवा केवल एक-एक बाल्टी पानी का इंतजाम करने में अपनी पूरी ऊर्जा खपा रहे हैं। पानी न मिलने से कई घरों की दिनचर्या पटरी से उतर गई है और लोग बेहद आक्रोशित हैं।

हैंडपंपों पर विवाद की स्थिति, निजी बोरवेलों पर पहरा

सप्लाई बंद होने का सीधा असर नगर के सार्वजनिक हैंडपंपों और कुओं पर पड़ा है। सुबह से ही सार्वजनिक हैंडपंपों पर बर्तनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। पानी भरने को लेकर लोगों के बीच वाद-विवाद और छीनाझपटी की नौबत आ रही है। वहीं, जिन लोगों के घरों में निजी बोरवेल हैं, वहां भी मोहल्लेवासियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर कम होने की वजह से हैंडपंप भी हांफने लगे हैं, जिससे स्थिति और अधिक विकराल हो गई है।

दावों की खुली पोल, वैकल्पिक इंतजाम तक नहीं

नगर परिषद प्रशासन हर साल त्योहारों से पहले बेहतर नागरिक सुविधाएं, निर्बाध जल प्रदाय और चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावे करता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसी संभावित तकनीकी खराबी से निपटने के लिए परिषद के पास कोई ‘प्लान-बी’ मौजूद नहीं था। सप्लाई बाधित होने के बाद भी परिषद ने वार्डों में टैंकरों से जलापूर्ति कराने की जहमत नहीं उठाई। नागरिकों का सीधा आरोप है कि जब भी जल संकट गहराता है, परिषद के जिम्मेदार फोन उठाना बंद कर देते हैं या फिर मोटर व पाइपलाइन खराबी का रटा-रटाया बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

जनता के तीखे सवाल:

 * पूर्व तैयारी क्यों नहीं? जब मालूम था कि त्योहारों पर पानी की खपत बढ़ेगी, तो जल संयंत्रों और मोटरों का समय पूर्व मेंटेनेंस क्यों नहीं कराया गया?

 * टैंकर किसके लिए सुरक्षित? नगर परिषद के पास मौजूद पानी के टैंकर संकट के समय आम जनता के वार्डों में क्यों नहीं दौड़ाए जा रहे?

 * लापरवाहों पर कार्रवाई कब? ऐन मौके पर जनता को प्यासा मारने वाली इस तकनीकी खराबी या प्रशासनिक विफलता का जिम्मेदार कौन है?

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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