खरीफ सीजन की आहट के साथ ही किसानों को उन्नत और उत्तम गुणवत्ता वाले बीज, खाद (उर्वरक) और कीटनाशक दवाएं सही दाम पर मिल सकें, इसे लेकर कृषि विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है
मझौली /जबलपुर
मंगलवार को मझौली क्षेत्र में कृषि विभाग के आला अधिकारियों की टीम ने अचानक विभिन्न कृषि आदान विक्रय केंद्रों (कृषि दुकानों) पर ताबड़तोड़ निरीक्षण कर हड़कंप मचा दिया।
इस औचक निरीक्षण दल में अनुविभागीय कृषि अधिकारी श्रीमती मनीषा पटेल, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जे. एस. राठौर एवं कृषि विस्तार अधिकारी सुश्री रिचा सिंह मुख्य रूप से शामिल रहीं। अधिकारियों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि किसानों के साथ गुणवत्ता या तय दरों को लेकर कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जांच टीम ने मझौली के प्रमुख प्रतिष्ठानों— शुभम कृषि केंद्र, प्रियांशी कृषि केंद्र, शिवशक्ति कृषि केंद्र एवं ओम कृषि केंद्र पर औचक दबिश दी। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने दुकानदारों के:
* स्टॉक रजिस्टर और विक्रय अभिलेख (बिक्री रिकॉर्ड)।
* दुकान के लाइसेंस संबंधी वैध दस्तावेज।
संबंधित कंपनियों के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट (PC) का बारीकी से परीक्षण किया।
राहत की बात: शुरुआती जांच में इन केंद्रों पर स्टॉक रजिस्टर और आवश्यक दस्तावेज सही पाए गए तथा लाइसेंस में संबंधित कंपनियों के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट भी संलग्न मिले।
अधिकारियों का कड़ा निर्देश: “बिना पक्के बिल के नहीं बिकेगी एक भी सामग्री”
निरीक्षण के दौरान कृषि अधिकारियों ने सभी खाद-बीज विक्रेताओं को सख्त हिदायत दी कि लाइसेंस में जिस कंपनी का ‘प्रिंसिपल सर्टिफिकेट’ संलग्न है, केवल उसी कंपनी की सामग्री बेची जाए।
साथ ही, अधिकारियों ने निर्देश दिए कि हर एक किसान को सामग्री बेचते समय निर्धारित प्रारूप में पक्का बिल देना अनिवार्य है। बिलिंग में किसी भी प्रकार की आनाकानी पाए जाने पर विक्रेता का लाइसेंस निरस्त करने जैसी वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
संदेह और गुणवत्ता की सटीक परख के लिए अधिकारियों ने दुकानों से बीज के 4 अलग-अलग नमूने (सैंपल्स) संग्रहित किए हैं। इन सैंपलों को आधिकारिक परीक्षण के लिए सरकारी लैब भेजा जा रहा है। यदि लैब रिपोर्ट में बीज अमानक (नकली या कम गुणवत्ता वाले) पाए जाते हैं, तो संबंधित विक्रेताओं पर कड़ी कानूनी गाज गिरना तय है।
किसानों से अपील: “पक्का बिल ही आपका सबसे बड़ा हथियार है”
कृषि विभाग ने क्षेत्र के तमाम अन्नदाताओं से अपील की है कि वे जब भी किसी दुकान से बीज, खाद या कीटनाशक दवाएं खरीदें, तो दुकानदार से पक्का बिल जरूर मांगें और उसे संभालकर रखें।
अधिकारियों ने कहा कि यदि भविष्य में फसल खराब होती है या बीज अमानक निकलता है, तो यही पक्का बिल दोषी विक्रेता के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने और किसान को मुआवजा दिलाने में सबसे बड़ा कानूनी आधार बनेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, मझौली (जबलपुर)
(कृषि विभाग, मध्य प्रदेश शासन द्वारा जनहित में जारी)




