शासन की लोक कल्याणकारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट किस कदर चढ़ती हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण जनपद पंचायत मझौली की ग्राम पंचायत अभाना में देखने को मिल रहा है।
अभाना/मझौली
यहाँ पिछले तीन महीनों से गरीबों के निवाले पर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि राशन वितरण का जिम्मा संभालने वाले सेल्समैन की कारस्तानियों के कारण सैकड़ों परिवार दाने-दाने को मोहताज हैं।
साढ़े तीन करोड़ का गबन और फरार एजेंट
ग्रामीणों के अनुसार, राशन बांटने का कार्य रत्नेश भट्ट द्वारा किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि रत्नेश भट्ट पर श्रीजी वेयर हाउस में साढ़े तीन करोड़ रुपए के गबन का गंभीर आरोप है, जिसके चलते उन पर एफआईआर (FIR) भी दर्ज की जा चुकी है। एफआईआर और गबन के मामले के बाद से ही सेल्समैन वितरण केंद्र से नदारद है, जिसका सीधा खामियाजा गरीब ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
सहकारिता विभाग की चुप्पी एयर और लापरवाही
सबसे बड़ा सवाल सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। जब विभाग को पता है कि वर्तमान सेल्समैन पर आपराधिक प्रकरण दर्ज है और वह तीन महीनों से ड्यूटी पर नहीं आया है, तो अब तक वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों का कहना है कि विभाग द्वारा किसी दूसरे एजेंट की नियुक्ति न किए जाने से तीन महीने का राशन लैप्स होने की कगार पर है।
ग्रामीणों की बढ़ती परेशानी
राशन दुकान पर ताला लटका देख ग्रामीण हर दिन खाली हाथ लौट रहे हैं। मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए बाजार से ऊंचे दामों पर अनाज खरीदना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही राशन वितरण शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
तीन महीने से राशन नहीं मिला है। सेल्समैन का कहीं अता-पता नहीं है और अधिकारी हमारी सुन नहीं रहे। क्या गरीबों का राशन डकारने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी?” — स्थानीय ग्रामीण, लक्ष्मी अभाना
सवाल:
क्या सहकारिता विभाग साढ़े तीन करोड़ के गबन के आरोपी को संरक्षण दे रहा है?
तीन महीने बीत जाने के बाद भी अभाना में दूसरे एजेंट की नियुक्ति क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों के हक का जो राशन तीन महीने से नहीं बंटा, उसका हिसाब कौन देगा?




