पत्रकारों की आवाज दबाने पर उठे सवाल, CM मोहन यादव से हस्तक्षेप और ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ की मांग

मध्य प्रदेश में खबर प्रकाशित या प्रसारित करने पर पत्रकारों के खिलाफ सीधे प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज किए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

भोपाल/मध्य प्रदेश

पत्रकारिता जगत और प्रबुद्ध वर्ग ने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने का प्रयास बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

तथ्यों का जवाब FIR से क्यों?

पत्रकारों के खिलाफ बिना किसी निष्पक्ष प्रारंभिक जांच के सीधे मामले दर्ज किए जाने की घटनाओं पर चिंता जताई गई है। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि किसी खबर से कोई व्यक्ति, जनप्रतिनिधि या अधिकारी असहमत है, तो उसका जवाब तथ्यों, स्पष्टीकरण और कानूनी प्रक्रिया के तहत दिया जाना चाहिए या फिर पुलिस की शक्ति का उपयोग कर पत्रकार की आवाज को कुचलने का प्रयास होगा?

विधिक विशेषज्ञों और पत्रकारों का कहना है कि यदि किसी खबर में तथ्यात्मक त्रुटि या मानहानि का विषय है, तो उसके लिए विधिक प्रावधान मौजूद हैं। लेकिन सामान्य खबरों को भी सीधे अपराध की श्रेणी में रखकर मामले दर्ज करना लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा के बिल्कुल विपरीत है।

सरकारी दिशा-निर्देशों की हो रही अनदेखी

मामले में सबसे बड़ा सवाल शासन और गृह विभाग द्वारा पूर्व में जारी किए गए दिशा-निर्देशों को लेकर है। पत्रकारों के विरुद्ध किसी भी शिकायत पर तुरंत अपराध दर्ज न करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रारंभिक जांच करने की व्यवस्था निर्धारित की गई है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर पुलिस और प्रशासन इन नियमों की अनदेखी कर सीधे कार्रवाई कर रहा है, जिससे निष्पक्ष पत्रकारिता पर दबाव की स्थिति बन रही है।

मुख्यमंत्री से सीधे संज्ञान और ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ की मांग

इस पूरी व्यवस्था को लेकर पत्रकारों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से स्वयं संज्ञान लेने की मांग की है:

 * पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हो: वर्षों से लंबित पत्रकार सुरक्षा कानून को प्रदेश में लागू किया जाए, ताकि पत्रकारों को झूठे मुकदमों और अनावश्यक प्रशासनिक दबाव से पारदर्शी सुरक्षा मिल सके।

 * तय प्रक्रिया का पालन: किसी भी पत्रकार के विरुद्ध शिकायत होने पर शासन के नियमों के अनुसार निष्पक्ष प्राथमिक जांच अनिवार्य की जाए।

 * जवाबदेही तय हो: सत्ता और प्रशासन से सवाल पूछने वाले पत्रकारों को प्रताड़ित करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।

पत्रकारिता का मूल दायित्व जनता के मुद्दों को सामने लाना और सत्ता से सवाल पूछना है। यदि सवाल पूछने की कीमत मुकदमों के रूप में चुकानी पड़ी, तो स्वतंत्र पत्रकारिता का अस्तित्व संकट में आ जाएगा। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाती है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

Latest News

Stay Connected

0FansLike
30FollowersFollow
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Most View