टिकुरी पंचायत में ‘पारिवारिक सिंडिकेट’ की खुली लूट: बर्खास्तगी के बाद भी नहीं सुधरीं सरपंच सीता देवी चौकसे,

इंदौर में पढ़ रहे बेटे के नाम बिल काटकर धारा 40 में पहले छिन चुकी है कुर्सी; अब सरपंच के खाते में सीधे ₹10 लाख और चहेतों की फर्मों से 20 लाख के फर्जीवाड़े का नया खुलासा

मझौली (जबलपुर)।

जनपद पंचायत मझौली की ग्राम पंचायत टिकुरी में पंचायती राज अधिनियम और प्रशासनिक शुचिता को तार-तार कर शासकीय धन के गबन का सुनियोजित खेल बदस्तूर जारी है। पद का दुरुपयोग कर विकास कार्यों की राशि परिजनों के खातों में ट्रांसफर करने के जुर्म में बर्खास्त हो चुकीं सरपंच सीता देवी चौकसे एक बार फिर भारी वित्तीय घोटाले के केंद्र में आ गई हैं। सबसे सनसनीखेज तथ्य यह है कि इस बार न केवल देवर और चहेतों की फर्मों के नाम पर 20 लाख रुपये के फर्जी देयक निकाले गए, बल्कि खुद सरपंच सीता देवी के खाते में ₹10,02,922 का सीधा भुगतान ट्रांसफर किया गया। ग्राम पंचायत सचिव संतोष जैन और उप-यंत्री (सब-इंजीनियर) अश्विनी तिवारी की सांठगांठ से कागजों पर निर्माण दिखाकर सरकारी खजाने में खुलेआम सेंधमारी की गई है।

छात्र बेटे के नाम काटे थे बिल, धारा 40 में पहले जा चुकी है प्रधानी

सरपंच सीता देवी चौकसे का पुत्र सिद्धांत चौकसे इंदौर में रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहा है। इसके बावजूद टिकुरी पंचायत में सामुदायिक भवन, चबूतरा और पंचायत भवन निर्माण में सामग्री प्रदायक दर्शाते हुए उसके नाम से लाखों के शासकीय बिल पास किए गए थे। मामला जिला पंचायत न्यायालय में पहुंचने पर तत्कालीन सीईओ के समक्ष सरपंच ने खुद स्वीकार किया था कि ₹1,11,050 की राशि छात्र बेटे सिद्धांत के खाते में भेजी गई। पंचायत दर्पण पोर्टल पर साक्ष्य पुख्ता होने के बाद विहित प्राधिकारी ने म.प्र. पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत सीता देवी को पद से बर्खास्त कर दिया था।

बर्खास्तगी के बाद महाघोटाला: खाते में सीधे लाखों की हेराफेरी

कुर्सी गंवाने के बावजूद भ्रष्ट सिंडिकेट का हौसला पस्त नहीं हुआ, बल्कि प्रशासनिक अमले के साथ मिलकर गबन का दायरा और बड़ा कर दिया गया। सामने आए नए बैंक और पोर्टल दस्तावेजों ने इस संगठित लूट की पोल खोल दी है:

 * सरपंच के निजी खाते में ₹10 लाख की सेंध: सरपंच सीता देवी चौकसे के खाते में पंचायत फंड से सीधे ₹10,02,922 का भुगतान अंतरित किया गया, जो शासकीय नियमों और वित्तीय मर्यादाओं का सीधा उल्लंघन है।

 * नवीन कोष्टा के नाम ₹5.34 लाख का आहरण: चहेते वेंडर नवीन कोष्टा की आईडी का उपयोग कर कागजी सामग्री आपूर्ति के एवज में ₹5,34,950 का संदिग्ध भुगतान पास करा लिया गया।

 * देवर की दुकान पर 26 लाख की मेहरबानी: इंद्राना स्थित सरपंच के सगे देवर की फर्म ‘बड़े बाबा हार्डवेयर’ को निर्माण सामग्री के नाम पर ₹26 लाख का शासकीय भुगतान जारी किया गया।

 * रिश्तेदार की फर्म से फर्जी निकासी: रिश्तेदार कैलाश चौकसे के प्रतिष्ठान ‘मां नर्मदा ट्रेडर्स’ की वेंडर आईडी से फर्जी वाउचर तैयार कर लाखों की राशि ठिकाने लगाई गई।

 * सचिव खुद बने सामग्री सप्लायर: ग्राम पंचायत सचिव संतोष जैन नियमों को ताक पर रखकर खुद वेंडर बन बैठे। आरोप है कि सचिव बनखेड़ी, इंद्राना और टिकुरी—तीनों पंचायतों में खुद की फर्म से सामग्री सप्लाई दिखाकर शासकीय बिल खुद ही डिजिटल हस्ताक्षर से पास कर रहे हैं।

उप-यंत्री और सचिव की आपराधिक मिलीभगत पर सवाल

पंचायती राज व्यवस्था के तय नियमों के मुताबिक, किसी भी निर्माण कार्य का भुगतान तब तक संभव नहीं है जब तक उप-यंत्री (सब-इंजीनियर) कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कर मेजरमेंट बुक (MB) दर्ज न करे और सचिव देयकों की वैधानिकता जांचकर डिजिटल हस्ताक्षर न करे। ऐसे में उप-यंत्री अश्विनी तिवारी और सचिव संतोष जैन की भूमिका सीधे तौर पर आपराधिक षड्यंत्र की ओर इशारा करती है। धरातल पर काम नगण्य होने के बावजूद इंदौर में पढ़ रहे छात्र, सरपंच के खुद के खाते और सगे देवर की दुकानों के नाम पर आंख मूंदकर फर्जी बिल सत्यापित किए गए।

धारा 92 में रिकवरी और तीनों पर नामजद एफआईआर की मांग तेज

इस व्यापक खुलासे के बाद मझौली जनपद से लेकर जिला प्रशासन तक हड़कंप मच गया है। स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने संभागायुक्त, जबलपुर कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को बिंदुवार साक्ष्य सौंपते हुए आर-पार की कार्रवाई की मांग की है:

 * ‘बड़े बाबा हार्डवेयर’, ‘मां नर्मदा ट्रेडर्स’, नवीन कोष्टा और सचिव से जुड़े तमाम संदिग्ध खातों की जिला स्तरीय तकनीकी दल से तत्काल भौतिक जांच कराई जाए।

 * सरपंच सीता देवी के खाते में पहुंचे ₹10,02,922 सहित फर्जी बिलों से आहरित करीब ₹20 लाख की राशि म.प्र. पंचायत राज अधिनियम की धारा 92 के तहत भू-राजस्व बकाया मानकर तत्काल कुर्क की जाए।

 * शासकीय धन के गबन, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और पद के आपराधिक दुरुपयोग के जुर्म में पूर्व सरपंच सीता देवी, सचिव संतोष जैन और उप-यंत्री अश्विनी तिवारी के विरुद्ध नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाए।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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