प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों की अनदेखी करना शहर के 25 चिकित्सा संस्थानों को भारी पड़ गया है।
जबलपुर
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने जिले के ऐसे 25 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जो ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (संचालन की सहमति) के बिना संचालित हो रहे थे। इन सभी संस्थानों को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह सख्त कदम मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में लंबित याचिका क्रमांक 48095/2025 और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार:
कानूनी अनिवार्यता: जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1981 के तहत हर चिकित्सा संस्थान के लिए संचालन की स्वीकृति और समय-समय पर उसका नवीनीकरण कराना अनिवार्य है।
उल्लंघन: जाँच में पाया गया कि ये संस्थान बिना वैध सहमति के कार्य कर रहे थे, जो पर्यावरण नियमों का सीधा उल्लंघन है
नोटिस पाने वाले संस्थानों की सूची में शहर के कई प्रमुख नाम शामिल हैं: विराट नेत्रालय, ब्लू स्काई मल्टीस्पेशलिटी, नोबेल मल्टीस्पेशलिटी, सनराइज हॉस्पिटल, नारायण हेल्थ केयर, साई मल्टीस्पेशलिटी, स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल, छवि आई हॉस्पिटल, श्री राम हॉस्पिटल, डॉ. मकसूदा अंसारी मेमोरियल, परम्भा नेत्रालय, शिव सागर हॉस्पिटल, महावीर मल्टीस्पेशलिटी एंड कैंसर हॉस्पिटल, गजकेसरी, अमृतसिटी, सिहोरा हॉस्पिटल, लाइफ केयर, प्राइम हेल्थ केअर, गोलछा आर्थो केयर, शिव नेत्रालय, विजयश्री मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, आइडियल फर्टिलिटी एंड आईवीएफ जेनेटिक सेंटर, देवश्री मल्टीस्पेशलिटी, संकल्प मल्टीस्पेशलिटी और विजया मेमोरियल हॉस्पिटल।
CMHO कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि संस्थान तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध मध्य प्रदेश नर्सिंग होम (पंजीयन एवं अनुज्ञापन) अधिनियम 1973 के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण मानकों से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि इन अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त होता है या संचालन पर रोक लगती है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित संस्था संचालकों की होगी।




