मध्य प्रदेश में नगरीय सीमा के भीतर आने वाले पेड़ों की कटाई और छंटाई को लेकर अब नियम पूरी तरह बदल गए हैं।
भोपाल
राज्य सरकार द्वारा जारी नए गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, अब नगर निगम के पास पेड़ों को काटने की अनुमति देने का अधिकार नहीं रहेगा। अब यह पूरी कमान वन विभाग के अधिकारियों के हाथों में सौंप दी गई है।
सरकार के इस फैसले से अब जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। गजट के अनुसार नियुक्तियां इस प्रकार हैं:
वृक्ष अधिकारी (Tree Officer):अब पूरे प्रदेश में नगर निगम सीमा के अंतर्गत वृक्षों को काटने की अनुमति देने के लिए रेंजर (वन क्षेत्रपाल) को ‘वृक्ष अधिकारी’ नियुक्त किया गया है।
अपीलीय अधिकारी (Appellate Authority): यदि वृक्ष काटने या संबंधित प्रक्रिया में कोई विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी सुनवाई का अधिकार सहायक वन संरक्षक (ACF) को दिया गया है।
अब तक नगर निगम सीमा में पेड़ों की कटाई के लिए निगम प्रशासन जिम्मेदार होता था। कई बार विकास कार्यों के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की शिकायतें आती रहती थीं। वन विभाग के विशेषज्ञों को यह जिम्मेदारी मिलने से:
1. बिना ठोस कारण पेड़ों की कटाई पर लगाम लगेगी।
2. पर्यावरण संरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन होगा।
3. विवादों का निपटारा तकनीकी विशेषज्ञों (ACF) द्वारा किया जाएगा।
इस निर्णय का स्वागत करते हुए विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह कदम पेड़ों के अवैध कटान को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। अब प्रदेश के सभी नगर निगमों में वृक्षों से संबंधित किसी भी अनुमति या विवाद के लिए उपरोक्त गजट नोटिफिकेशन के अनुसार ही क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्य बात: अब यदि आपको अपनी कॉलोनी या परिसर में पेड़ की छंटाई या कटाई करानी है, तो आपको नगर निगम के दफ्तर नहीं बल्कि संबंधित क्षेत्र के रेंजर (वृक्ष अधिकारी) के पास आवेदन करना होगा।




