आर-पार के मूड में कोटवार: मझौली तहसीलदार को सौंपा CM के नाम ज्ञापन, 21 तक काली पट्टी बांधकर काम, 30 से भोपाल में महापड़ाव की चेतावनी

 गांधी जयंती से काली पट्टी बांधकर शासकीय कार्य कर रहे कोटवार, 22 अक्टूबर से जिलों में कामबंद हड़ताल का अल्टीमेटम

 * नियमितीकरण, सेवाभूमि के मालिकाना हक, वर्दी घोटाले की जांच सहित 7 सूत्रीय मांगों पर शासन के खिलाफ खोला मोर्चा

मझौली (जबलपुर)।

राजस्व प्रशासन की सबसे बुनियादी और मजबूत रीढ़ माने जाने वाले ग्राम कोटवार अब अपने सम्मान, वजूद और अधिकारों की रक्षा के लिए आर-पार के संघर्ष के मूड में आ चुके हैं। ‘म.प्र. आजाद कोटवार कर्मचारी संघ’ के प्रांतीय आह्वान पर मझौली तहसील के कोटवारों ने लामबंद होकर मझौली तहसीलदार को प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के नाम 7 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से शासन को दो टूक चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी वर्षों पुरानी न्यायोचित मांगों का तत्काल स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के 38 हजार कोटवार चरणबद्ध आंदोलन के अंतिम पड़ाव के रूप में 30 अक्टूबर से राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन महापड़ाव डालेंगे।

21 तक काली पट्टी, 22 से ठप होगा काम

तहसीलदार मझौली को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, कोटवारों का आंदोलन पूर्व निर्धारित रूपरेखा के तहत शुरू हो चुका है:

 * प्रथम चरण (2 से 21 अक्टूबर): गांधी जयंती से शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन के तहत मझौली सहित प्रदेश भर के कोटवार बांह पर काली पट्टी बांधकर शासकीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं और तहसीलदार के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचा रहे हैं।

 * दूसरा चरण (22 अक्टूबर): प्रदेश के सभी 55 जिलों में मानवीय व जीवन रक्षक कार्यों को छोड़कर पूर्ण कामबंद हड़ताल की जाएगी और जिला मुख्यालयों पर टेंट लगाकर धरना दिया जाएगा।

 * रैली व अंतिम सूचना (28 अक्टूबर): सभी जिला मुख्यालयों पर कोटवार संघ रैली निकालकर कलेक्टर एवं क्षेत्रीय विधायक को अंतिम ज्ञापन सौंपेगा और 30 अक्टूबर को भोपाल कूच करने की विधिवत सूचना देगा।

 * भोपाल महापड़ाव (30 अक्टूबर से): यदि 28 अक्टूबर तक शासन स्तर पर सकारात्मक आदेश जारी नहीं होते, तो प्रदेश के सभी 38,000 कोटवार भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।

मझौली में गूंजीं ये 7 प्रमुख मांगें

ज्ञापन में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष जताते हुए प्रमुख 7 मांगों पर तुरंत आदेश जारी करने पर बल दिया गया:

 * शासकीय कर्मचारी का दर्जा व पदोन्नति: प्रदेश के सभी 38 हजार कोटवारों को स्थायी शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए। 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके योग्य कोटवारों को योग्यतानुसार सहायक पटवारी, भृत्य, वाहन चालक, कंप्यूटर ऑपरेटर और सहायक ग्रेड-3 जैसे समकक्ष पदों पर पदोन्नत/समायोजित किया जाए।

 * सेवाभूमि का मालिकाना हक बहाल हो: अंग्रेजों व मध्य भारत के शासनकाल से कोटवारों को मिली पैतृक सेवाभूमि से राजस्व विभाग द्वारा हटाए गए कोटवारों के नाम खसरे में पुनः दर्ज कर पूर्ववत मालिकाना हक दिया जाए।

 * मानदेय वृद्धि व CUG सिम: कोटवार पंचायत 2023 की घोषणा के अनुसार भूमिधारी कोटवारों को भी प्रतिवर्ष ₹500 की वेतन वृद्धि दी जाए तथा बैलेंस सहित शासकीय सीयूजी (CUG) सिम उपलब्ध कराई जाए।

 * वर्दी घोटाले की उच्च स्तरीय जांच: हाईकोर्ट जबलपुर के आदेश की अनदेखी कर ठेकेदारों के जरिए बांटी जा रही अनुपयोगी व घटिया वर्दी का टेंडर निरस्त हो। वर्ष 2024 से पहले की तरह वर्दी की राशि सीधे बैंक खाते में दी जाए और इस कथित वर्दी घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।

 * नगरीय क्षेत्रों में पद बहाली: नगरीय क्षेत्रों में कोटवार पद समाप्त करने और ‘एक ग्राम-एक कोटवार’ के नियम को वापस लिया जाए, क्योंकि बढ़ती आबादी के बीच शहरी तहसीलों में भी कोटवार लगातार सेवाएं दे रहे हैं।

 * परंपरागत नियुक्ति व सामाजिक सुरक्षा: कोटवार के रिक्त पद पर उसी के परिवार के सदस्य को पटवारी प्रतिवेदन व थाना चरित्र प्रमाण पत्र के आधार पर बिना पंचायत प्रस्ताव के प्राथमिकता से नियुक्ति मिले। सेवाकाल में मृत्यु पर ₹10 लाख की अनुग्रह राशि और सेवानिवृत्ति राशि ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख की जाए।

 * कटनी जिले का 15 साल का एरियर: कटनी जिले में अधिक भूमि का हवाला देकर पिछले 15 वर्षों से रोके गए मानदेय का भुगतान कोटवार पंचायत 2023 (न्यूनतम ₹1000) के अनुसार पूर्व वर्षों के एरियर सहित एकमुश्त किया जाए।

‘अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं’

ज्ञापन सौंपते समय मझौली तहसील क्षेत्र के समस्त कोटवार साथी और संघ के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कोटवारों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांव में जन्म-मृत्यु की सूचना से लेकर प्रशासनिक मुनादी, कानून-व्यवस्था और राजस्व रिकॉर्ड तक का काम कोटवार दिन-रात संभालते हैं, लेकिन सरकार उनके मूल अधिकारों की अनदेखी कर रही है। प्रधानमंत्री के ‘मैं भी चौकीदार’ के सम्मान में अब तक शांति बनाए रखी गई, किंतु अब आत्मसम्मान की रक्षा के लिए मझौली से लेकर भोपाल की सड़कों तक आर-पार का संघर्ष किया जाएगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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