स्वास्थ्य और महिला-बाल विकास विभाग का साझा फील्ड ऑडिट: हर मंगलवार और शुक्रवार को ग्राउंड पर उतरेंगी संयुक्त टीमें, 15 दिन का अल्टीमेटम

कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा की दो टूक—दफ्तरों से निकलें अफसर, मौके पर ही दूर हों कमियां; हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की अर्ली ट्रैकिंग और डेथ ऑडिट अनिवार्य

 * BMO और CDPO हर हफ्ते दो दिन करेंगे संयुक्त दौरा; 15 दिन बाद होगा कार्यों का कड़ा पुनर्मूल्यांकन

 * संस्थागत प्रसव में मौत पर होगा तकनीकी विश्लेषण; अप्रयुक्त जीवन रक्षक उपकरणों पर नपेंगे चिकित्सा अधिकारी

 * मरीजों से संवेदनशीलता से पेश आएं चिकित्सक; 90% आभा आईडी पूर्ण, छूटे बच्चों के शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य

जबलपुर

जिले के स्वास्थ्य ढांचे को चुस्त-दुरुस्त करने और मातृ एवं शिशु कल्याण से जुड़ी फ्लैगशिप योजनाओं को अंतिम पंक्ति के हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय संयुक्त समीक्षा बैठक में कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास (WCD) विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताते हुए ‘इंटर-डिपार्टमेंटल मॉनिटरिंग मॉडल’ लागू करने का फरमान सुनाया।

कलेक्टर ने दोनों विभागों के अलग-थलग काम करने के ढर्रे पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि अब स्वास्थ्य विभाग के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) और महिला एवं बाल विकास विभाग के बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को अनिवार्य रूप से संयुक्त फील्ड विजिट करेंगे। मैदानी विसंगतियों को ठीक करने के लिए अधिकारियों को 15 दिन की मोहलत दी गई है, जिसके बाद मैदानी प्रगति की समीक्षा होगी। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गेहलोत सहित दोनों विभागों का तकनीकी अमला मौजूद रहा।

संयुक्त ऑडिट: स्पॉट पर ही तय होगी कमियों के निराकरण की जवाबदेही

प्रशासनिक समीक्षा में यह बात सामने आई कि दोनों प्रमुख विभागों के बीच आपसी तालमेल और समन्वय के अभाव में कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लक्षित महिलाओं और बच्चों तक समय पर नहीं पहुंच पाता।

 * क्रॉस-वेरिफिकेशन और एक्शन रिपोर्ट: अब ब्लॉक, सेक्टर और ग्राम स्तर पर गठित साझा प्रशासनिक दल फील्ड में उतरकर आंगनवाड़ी केंद्रों, उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHC) और प्रसव इकाइयों (Delivery Points) का औचक निरीक्षण करेंगे।

 * दस्तावेजीकरण अनिवार्य: निरीक्षण के दौरान मिलने वाली अधोसंरचनात्मक कमियों, दवाओं की अनुपलब्धता या टेक होम राशन (THR) के वितरण में पाई जाने वाली किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को मौके पर ही आधिकारिक पंजी में दर्ज किया जाएगा और बिना किसी देरी के सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

मातृत्व व शिशु सुरक्षा: हाई-रिस्क मामलों की शत-प्रतिशत मैपिंग

मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए कलेक्टर ने एएनसी (ANC) पंजीयन को समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए।

 * प्रारंभिक पहचान: पहली तिमाही में ही जोखिम वाली गर्भावस्थाओं (High-Risk Pregnancies) की पहचान कर उनकी विशेष मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि प्रसव के अंतिम समय में गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं न बनें।

 * डेथ ऑडिट की सख्त व्यवस्था: संस्थागत प्रसव के दौरान यदि किसी प्रसूता या नवजात की मृत्यु दर्ज होती है, तो उसके कारणों का केस-टू-केस तकनीकी विश्लेषण (Technical Clinical Audit) किया जाएगा। स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध जीवन रक्षक उपकरणों और संसाधनों के अप्रयुक्त पाए जाने पर संबंधित संस्था प्रभारी और चिकित्सा अधिकारी के विरुद्ध सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

मरीजों से मानवीय व्यवहार बरतें चिकित्सक; लगेंगे विशेष नेत्र शिविर

अस्पतालों में डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच संवादहीनता से बिगड़ने वाले माहौल पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा कि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों और तीमारदारों के साथ संवेदनशील व्यवहार रखें। उन्होंने कहा कि रूखे व्यवहार के कारण अस्पतालों में बनने वाली अप्रिय स्थितियों को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसके साथ ही स्वास्थ्य अमले को निर्देश दिए गए:

 * टीकाकरण से छूटे बच्चों का घर-घर सर्वे कर विशेष कैच-अप राउंड के जरिए शत-प्रतिशत प्रतिरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

 * गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से ग्रस्त बच्चों को तत्काल चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) में भर्ती कराया जाए।

 * जनसेवा से जुड़े ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए जिलेभर में विशेष नेत्र जांच शिविर आयोजित किए जाएं।

डिजिटल ट्रैकिंग व बुनियादी अधोसंरचना: रिपोर्ट कार्ड

| प्रमुख बिंदु / योजना | वर्तमान स्थिति | प्रशासनिक निर्देश

| आभा (ABHA) आईडी | ~90% कार्य पूर्ण | शेष 10% लक्ष्य को समयबद्ध अभियान चलाकर तुरंत पूरा करें |

| अपार (APAAR) आईडी | ~60% प्रगति दर्ज | शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित हो |

| पोषण ट्रैकर ऐप | दैनिक डेटा एंट्री जारी | रियल-टाइम डेटा अपडेट और पारदर्शी पोषण वितरण की अनिवार्य शर्त |

| पीएम जनमन व आंगनवाड़ी भवन | कई इकाइयां निर्माणाधीन | निर्माण गुणवत्ता से समझौता किए बिना तय समय-सीमा में हैंडओवर करें |

| सीएम हेल्पलाइन | कई स्तरों पर लंबित प्रकरण | संतुष्टिपूर्ण निराकरण न मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर होगी कार्रवाई |

सीएम हेल्पलाइन और योजनाओं के क्रियान्वयन में जीरो टॉलरेंस

कलेक्टर ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) और लाड़ली लक्ष्मी योजना के लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से निपटारा करने के निर्देश दिए। सीएम हेल्पलाइन की विभागवार समीक्षा करते हुए उन्होंने दो टूक कहा कि शिकायतों को केवल फाइलों में ‘फोर्स क्लोज’ करने की प्रवृत्ति बंद की जाए। शिकायतकर्ता की वास्तविक संतुष्टि ही निराकरण का एकमात्र पैमाना होगी। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आगामी पखवाड़े में कागजी आंकड़ों से इतर जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं में गुणात्मक सुधार दिखना अनिवार्य है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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