जनपद सीईओ के आदेश को सहायक यंत्री ने दिखाया ठेंगा!
ढीमरखेड़ा/उमरियापान (कटनी)।
कटनी जिले की जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा में प्रशासनिक अनुशासन और कार्यप्रणाली पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। आला अधिकारियों के आदेशों को मातहत किस कदर हवा में उड़ाते हैं, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण ग्राम पंचायत धरवारा से सामने आया है। यहां निर्माण कार्य की 40 हजार रुपये की बकाया राशि के भुगतान और गड़बड़ी की जांच का मामला पूरी तरह प्रशासनिक मिलीभगत और अफसरों की हीलाहवाली की भेंट चढ़ गया है। जनपद सीईओ द्वारा दो दिन के भीतर जांच पूरी कर प्रतिवेदन देने के सख्त निर्देश दिए गए थे, लेकिन दो महीने का लंबा अरसा बीत जाने के बावजूद सहायक यंत्री जांच रिपोर्ट दबाए बैठे हैं।
दो दिन का था आदेश, गुजर गए दो महीने
जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत धरवारा में निर्माण कार्य से जुड़े वित्तीय विवाद और भुगतान को लेकर जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने गत 29 जुलाई को कड़ा रुख अपनाया था। सीईओ ने सहायक यंत्री अजय केसरवानी को स्पष्ट लिखित निर्देश दिए थे कि वे मौके पर जाकर तकनीकी व वित्तीय दस्तावेजों की जांच करें और मात्र 2 दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन जनपद कार्यालय में प्रस्तुत करें।
हैरानी की बात यह है कि जिस जांच को 48 घंटे में पूरा होना था, उस पर 60 दिन बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई। सहायक यंत्री की इस कार्यशैली ने पूरे प्रशासनिक अमले को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सीईओ ने थमाया कड़ा स्मरण पत्र, कलेक्टर तक पहुंची गूंज
जांच लटकाए रखने के इस रवैये पर जनपद सीईओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए 1 सितंबर को सहायक यंत्री को दोबारा कड़ा स्मरण पत्र (रिमाइंडर) जारी किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर कटनी और जिला पंचायत सीईओ को भी भेजी गई है। इसके बावजूद जिम्मेदार सहायक यंत्री के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। खुले तौर पर आला अफसर के आदेश की नाफरमानी यह दर्शाती है कि जनपद में जमीनी स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण शून्य हो चुका है।
सरपंच-सचिव को बचाने की रची जा रही साजिश: पीड़ित
शिकायतकर्ता ठेकेदार शैलेश बाजपेयी ने मामले में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि पंचायत में कराए गए वैध निर्माण कार्य की 40 हजार रुपये की बकाया राशि का भुगतान लंबे समय से अटकाया गया है। जब इसकी शिकायत वरिष्ठ स्तर पर की गई, तो सरपंच और सचिव को बचाने के लिए सुनियोजित तरीके से जांच को ही उलझा दिया गया।
शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि सहायक यंत्री द्वारा जांच में की जा रही जानबूझकर देरी लीपापोती और सांठगांठ की खुली गवाही दे रही है, ताकि समय बीतने के साथ मामला रफा-दफा हो जाए।
मुख्य बिंदु: फाइल में कैद सिस्टम
* 29 जुलाई: जनपद सीईओ ने सहायक यंत्री अजय केसरवानी को 2 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने का दिया था लिखित आदेश।
* 01 सितंबर: रिपोर्ट न मिलने पर सीईओ ने जारी किया कड़ा स्मरण पत्र; कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ को भेजी प्रतिलिपि।
* 60 दिन बाद भी शून्य: दो माह बीतने के बाद भी सहायक यंत्री ने नहीं दी जांच रिपोर्ट, राशि भुगतान अधर में।
गंभीर आरोप: सरपंच-सचिव की गर्दन बचाने के लिए जांच दबाने और लीपापोती का षड्यंत्र।
निष्पक्ष जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग
पीड़ित ठेकेदार ने जिला प्रशासन, कलेक्टर कटनी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। मांग की गई है कि धरवारा पंचायत के निर्माण कार्य, मस्टर रोल, मूल्यांकन पुस्तिका और भुगतान से जुड़े समस्त तकनीकी व वित्तीय दस्तावेजों की किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा निष्पक्ष जांच दल से पड़ताल कराई जाए। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारियों के विधिवत आदेशों की खुली अवहेलना करने वाले सहायक यंत्री एवं संबंधित लापरवाह जिम्मेदारों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए लंबित भुगतान तत्काल कराया जाए।
बड़ा सवाल:
जब जनपद के मुखिया (सीईओ) के लिखित आदेश को मातहत अधिकारी दो-दो महीने तक कूड़ेदान में डाल सकते हैं, तो आम जनता और छोटे ठेकेदारों की सुनवाई की क्या गारंटी रह जाती है? क्या जिला प्रशासन इस खुली प्रशासनिक बगावत पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा या धरवारा का यह भ्रष्टाचार भी फाइलों की धूल फांकता रहेगा?