मझौली व आसपास अवैध ई-स्कूटी एजेंसियों की बाढ़: ‘बिना नंबर-बिना लाइसेंस’ के झांसे में फंसा रहे ग्राहक, हादसों और ठगी का केंद्र बने गली-मोहल्ले

आरटीओ के ट्रेड सर्टिफिकेट बिना बिक रहीं गाड़ियां; हाई-स्पीड मॉडलों में सॉफ्टवेयर बाईपास का खेल, न गारंटी न सुरक्षा मानक

मझौली (जबलपुर)।

नगर परिषद मझौली सहित सिहोरा, पाटन और कटंगी के कस्बाई व ग्रामीण अंचलों में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का कारोबार बिना किसी कानूनी लगाम के जंगलराज में तब्दील हो चुका है। मुख्य चौराहों से लेकर तंग गलियों तक कुकुरमुत्ते की तरह खुली तथाकथित ईवी एजेंसियां केंद्रीय मोटर वाहन नियमों को खुलेआम ठेंगा दिखा रही हैं। बिना ट्रेड सर्टिफिकेट, घटिया असेंबल्ड पुर्जों और बिना सुरक्षा प्रमाणीकरण के बेची जा रही ये गाड़ियां ग्राहकों की जेब तो काट ही रही हैं, साथ ही सड़कों पर चलते-फिरते बारूद के ढेर की तरह घूम रही हैं। इस पूरे फर्जीवाड़े पर क्षेत्रीय परिवहन विभाग (RTO) और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

झांसा: ‘लो-स्पीड’ बताकर बेच रहे हाई-स्पीड गाड़ियां

एजेंसी संचालकों का सबसे बड़ा हथियार ग्रामीण व कस्बाई ग्राहकों का तकनीकी रूप से अनभिज्ञ होना है। दुकानों के बाहर बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर प्रचारित किया जाता है—”न ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत, न RTO रजिस्ट्रेशन का झंझट।”

जमीनी पड़ताल में सामने आया है कि 800 से 1500 वॉट तक की हाई-स्पीड क्षमता वाली गाड़ियों में अस्थायी रूप से ‘स्पीड गवर्नर’ या डिजिटल लॉक लगाकर उन्हें 25 किमी/घंटा का बता दिया जाता है। ग्राहक से पूरी रकम वसूलने के बाद डिलेवरी के समय या कुछ दिन बाद तार काटकर या कंट्रोलर सॉफ्टवेयर को क्रैक कर लॉक खोल दिया जाता है। इसके बाद ये गाड़ियां सड़कों पर 50 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ती हैं। कानूनन ऐसी गाड़ियों का आरटीओ पंजीयन, इंश्योरेंस और चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य है, लेकिन कागजों में इन्हें ‘लो-स्पीड साइकिल’ का दर्जा देकर बेचा जा रहा है।

कानून बनाम मनमानी: CMVR नियमों की सीधी अवहेलना

केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली (CMVR), 1989 और मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम के तहत तय कड़े सुरक्षा मानकों को मझौली क्षेत्र में ताक पर रख दिया गया है:

मानक एवं नियम | विधिक प्रावधान | जमीनी हकीकत व उल्लंघन 

लो-स्पीड श्रेणी (CMVR 2u) | अधिकतम मोटर क्षमता 250W और शीर्ष गति 25 किमी/घंटा। केवल इसी श्रेणी को पंजीयन से छूट है। | 800W से 1500W मोटर वाली गाड़ियां खुलेआम बिना पंजीयन और बिना नंबर प्लेट बेची जा रही हैं। |

डीलर ट्रेड सर्टिफिकेट (CMVR 34) | किसी भी वाहन के विक्रय, प्रदर्शन या भंडारण के लिए आरटीओ से वैध ट्रेड सर्टिफिकेट लेना कानूनी बाध्यता है। | अधिकांश दुकानें सिर्फ सामान्य गुमाश्ता या मनगढ़ंत ट्रेडमार्क के सहारे चल रही हैं; RTO ट्रेड सर्टिफिकेट नदारद है। |

टाइप अप्रूवल (प्रमाणीकरण) | मॉडल का ARAI (पुणे) या ICAT (मानेसर) जैसी सरकारी एजेंसियों से पास होना अनिवार्य। | गैर-मान्यता प्राप्त गैर-ब्रांडेड चाइनीज किट लाकर लोकल स्तर पर असेंबल कर मनमाने ब्रांड नाम से बेची जा रही हैं। |

 बैटरी व अग्नि सुरक्षा मानक | AIS-156 और AIS-038 Rev-2 के अनुसार परीक्षणित व थर्मल कट-ऑफ वाली बैटरियां अनिवार्य। | घटिया बीएमएस (बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम) वाली सस्ती बैटरियां लगाई जा रही हैं, जिनमें ब्लास्ट और शॉर्ट-सर्किट का खतरा है। |

 बिक्री उपरांत सेवा (Consumer Act) | उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत कंपनी अधिकृत सर्विस सेंटर और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता अनिवार्य। | 6 महीने बाद दुकानें बंद हो जाती हैं या संचालक पल्ला झाड़ लेते हैं; मैकेनिक तक उपलब्ध नहीं हैं। |

अनभिज्ञ खरीदारों पर कानूनी और वित्तीय तलवार

इस फर्जीवाड़े में सबसे ज्यादा नुकसान आम मध्यमवर्गीय और ग्रामीण उपभोक्ता का हो रहा है, जो पेट्रोल के बढ़ते खर्च से बचने के लिए गाड़ियां खरीद रहे हैं:

 * ₹10,000 तक का भारी-भरकम चालान: यदि जांच के दौरान गाड़ी की गति या मोटर क्षमता 25 किमी/घंटा व 250W से अधिक पाई जाती है, तो बिना नंबर, बिना हेलमेट और बिना लाइसेंस के तहत ₹5,000 से ₹10,000 तक का समन शुल्क और गाड़ी ज़ब्त हो सकती है।

 * सड़क हादसे में शून्य बीमा क्लेम: बिना पंजीयन और अवैध रूप से मॉडिफाई की गई गाड़ी से दुर्घटना होने पर बीमा कंपनियां फूटी कौड़ी भी नहीं देतीं। उल्टे थर्ड पार्टी नुकसान का पूरा हर्जाना चालक व मालिक की जेब से भरना पड़ेगा।

 * वारंटी का फर्जीवाड़ा: वारंटी के नाम पर सादे पर्चे पर 3 साल की मुहर लगाकर दी जा रही है। खराबी आने पर संचालक “कंपनी बंद हो गई” कहकर ग्राहकों को लौटा देते हैं।

जांच और सीलिंग की उठी मांग

मझौली, सिहोरा और पाटन क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने संभागीय परिवहन अधिकारी (RTO जबलपुर), अनुविभागीय अधिकारी (SDM) और स्थानीय पुलिस से तत्काल संयुक्त अभियान चलाने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि:

 * क्षेत्र में संचालित सभी दोपहिया ईवी दुकानों के RTO ट्रेड सर्टिफिकेट, GST रिटर्न और वाहनों के ARAI/ICAT अप्रूवल सर्टिफिकेट की भौतिक जांच हो।

 * बिना पंजीयन धड़ल्ले से चल रही दुकानों को तत्काल सील कर अवैध स्टॉक ज़ब्त किया जाए।

 * ग्राहकों को धोखे में रखकर हाई-स्पीड गाड़ियों को लो-स्पीड बताकर बेचने वालों पर धोखाधड़ी (IPC/BNS) और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज हो।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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