खनिज नियमों व NGT की गाइडलाइंस की उड़ाई जा रहीं धज्जियां, जलधारा में मशीनें उतारकर अवैध निकासी
* कूड़ा और बम्होरी के बीच हियन नदी में चल रही बोट, ग्रामीणों ने फोटो-साक्ष्यों के साथ कलेक्टर व खनिज विभाग से की शिकायत
मझौली /जबलपुर
संस्कारधानी के ग्रामीण अंचलों में रेत माफिया के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका जीता-जागता और सनसनीखेज प्रमाण ग्राम पंचायत टिकुरी अंतर्गत कूड़ा और बम्होरी के बीच स्थित घाट पर देखने को मिल रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट आदेशों और खनिज नियमों को ताक पर रखकर हियन नदी के बीचों-बीच प्रतिबंधित मोटर बोट और आधुनिक सक्शन मशीनों के जरिए दिन-रात रेत का अंधाधुंध अवैध दोहन किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल में किसी बाहरी गिरोह का नहीं, बल्कि पंचायत की प्रथम नागरिक यानी सरपंच, उनके शासकीय शिक्षक पति, देवर और उनके करीबियों की सीधी संलिप्तता का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने दस्तावेजी साक्ष्यों और मौके की पुख्ता तस्वीरों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर इस गोरखधंधे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
प्रतिबंधित मोटर बोट से जलधारा छलनी, जलीय पारिस्थितिकी तबाह
मध्य प्रदेश खनिज साधन विभाग और एनजीटी की सख्त गाइडलाइंस हैं कि किसी भी नदी की मुख्य जलधारा से भारी मशीनरी, सक्शन पंप या मोटर बोट के जरिए रेत की निकासी पूर्णतः गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है। नदी के बीच से सक्शन करने पर जलीय जीवों का पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट होता है और नदी का प्राकृतिक प्रवाह दिशा बदल लेता है, जिससे बरसात के दिनों में किनारे के गांवों में कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
लेकिन टिकुरी पंचायत के कूड़ा और बम्होरी के बीच स्थित इस घाट पर कायदे-कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नदी के गहरे पानी में शक्तिशाली मोटर बोट और पाइप डालकर रेत सीधे खींची जा रही है और किनारे पर डंप कर बिना किसी रॉयल्टी या टीपी (परिवहन पास) के दर्जनों ट्रैक्टरों व ट्रकों के जरिए काला कारोबार चलाया जा रहा है।
पद और रसूख की आड़: शासकीय शिक्षक और सत्येन्द्र के पुत्र पर सीधी संलिप्तता के आरोप
कलेक्टर एवं जिला खनिज अधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने सीधा और सनसनीखेज आरोप लगाया है कि इस अवैध उत्खनन को टिकुरी ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती सीतादेवी चौकसे, उनके पति कौशल चौकसे और देवर कैलाश चौकसे का सीधा संरक्षण हासिल है।
वहीं धरातल पर नदी के बीच मोटर बोट उतारकर संचालन कराने में सत्येन्द्र भैया के लड़के की सीधी भूमिका बताई गई है, जिसकी बोट चौबीसों घंटे नदी में रेत उगल रही है। मामले में सबसे गंभीर पहलू सरपंच पति कौशल चौकसे को लेकर है, जो खुद शासकीय सेवा में शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकारी मुलाजिम और जनप्रतिनिधि का परिवार ही पद व प्रभाव का दुरुपयोग कर सरकारी राजस्व को करोड़ों की चपत लगाएगा, तो कानून की मर्यादा कैसे बचेगी?
ग्रामीणों ने सौंपे डिजिटल साक्ष्य, रखीं 3 प्रमुख मांगें
स्थानीय जागरूक नागरिक सुरेश बर्मन, राजगोपाल तिवारी, प्रथम खरे सहित अन्य ग्रामीणों ने नदी के बीच चल रही बोट, डंपिंग और परिवहन के छायाचित्र प्रशासन के सामने पेश किए हैं। ग्रामीणों ने तत्काल निम्नलिखित बिंदुओं पर सख्त एक्शन की मांग की है:
* तत्काल जब्ती व सीलिंग: कूड़ा-बम्होरी घाट पर चल रही अवैध मोटर बोटों (सत्येन्द्र के पुत्र की बोट सहित), सक्शन मशीनों और परिवहन में लगे वाहनों को तुरंत जब्त कर घाट को सील किया जाए।
* आपराधिक प्रकरण (FIR): मध्य प्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण का निवारण) नियम तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत नामजद एफआईआर दर्ज हो।
* शासकीय शिक्षक पर निलंबन की गाज: सरकारी सेवा में रहते हुए अवैध खनन के सिंडिकेट से जुड़े शिक्षक के विरुद्ध सिविल सेवा आचरण संहिता के तहत तत्काल निलंबन और विभागीय जांच बिठाई जाए।
“नियम सबके लिए बराबर हैं। अगर जनप्रतिनिधि और सरकारी तंत्र से जुड़े लोग ही नदियों का सीना छलनी करने लगेंगे, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी? यदि प्रशासन ने जल्द ही मौके पर पहुंचकर जब्ती की कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीण कलेक्ट्रेट का घेराव करने को मजबूर होंगे।”
— शिकायतकर्ता ग्रामीण, ग्राम पंचायत टिकुरी मझौली जबलपुर




