कलेक्ट्रेट की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से मलाईदार कुर्सियों और सुविधाजनक जगहों पर जमे ‘अटैचमेंट बाबू और कर्मचारियों’ के खेल को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने और ग्रामीण अंचलों में डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए एक बहुत बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।

जबलपुर

इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल पर एक तगड़ा और कड़क समाचार लेख नीचे दिया गया है:
जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक हंटर: कलेक्टर के निर्देश पर सभी कर्मचारियों का ‘संलग्नीकरण’ (Attachment) समाप्त, मूल पदस्थापना पर लौटने के आदेश!
सीएमएचओ ने जारी किया कड़ा फरमान; नियमित, संविदा और रोगी कल्याण समिति के सभी कर्मचारियों पर लागू होगा आदेश, तुरंत होना होगा कार्यमुक्त।
जबलपुर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के बाद, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में विभिन्न स्तरों पर किए गए कर्मचारियों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग में रसूख या सुविधा के नाम पर अपनी मूल पदस्थापना (Main Posting) छोड़कर बड़े अस्पतालों या मुख्य कार्यालयों में अटैचमेंट कराने का खेल लंबे समय से चल रहा था। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही थीं।
सीएमएचओ द्वारा जारी नए आदेश के तहत:
यह आदेश नियमित (Regular), संविदा (Contractual) और रोगी कल्याण समिति (RKS) के तहत कार्यरत सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगा।
अटैचमेंट पर चल रहे सभी अधिकारी-कर्मचारियों को तुरंत अपने मूल पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर कार्यभार संभालना होगा।
संस्था प्रभारियों को अल्टीमेटम: लापरवाही की तो नपेगें!
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं के प्रभारियों (BMO और प्रभारी डॉक्टरों) को दोटूक निर्देश दिए हैं कि उनके अधीन अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त (Relieve) किया जाए।
इसके साथ ही, सभी प्रभारियों को कार्यमुक्त किए गए कर्मचारियों की विस्तृत रिपोर्ट अविलंब सीएमएचओ कार्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी संस्था प्रभारी ने आदेश के बाद भी किसी कर्मचारी को रोक कर रखा या संरक्षण दिया, तो उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
ग्रामीण मरीजों को मिलेगा हक, सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के इस कड़े फैसले की हर तरफ सराहना हो रही है। इस निर्णय से सबसे बड़ी राहत ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को मिलेगी, जिन्हें अस्पतालों में स्टाफ न होने के कारण इलाज के लिए जिला अस्पताल या निजी सेंटरों की ओर भागना पड़ता था। अब जब सभी कर्मचारी अपनी मूल तैनाती वाली जगहों पर लौटेंगे, तो जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
प्रशासन के इस ‘सर्जीकल स्ट्राइक’ से स्वास्थ्य महकमे के उन कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, जो जुगाड़ के दम पर सालों से शहरी और सुविधाजनक क्षेत्रों में अंगद की तरह पैर जमाए बैठे थे।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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