मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ऐसी कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने रिश्तों की मर्यादा और प्रशासनिक शुचिता, दोनों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
भोपाल
यह कहानी है तहसीलदार शैलेंद्र बिहारी शर्मा और उनकी पत्नी DSP ख्याति मिश्रा की।
कभी एक-दूसरे का संबल बने इस जोड़े के बीच अब ऐसी दरार आ चुकी है कि पति अपनी ही पत्नी की ‘खाकी’ उतरवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। मामला अब 2 सेंटीमीटर की उस ‘लंबाई’ पर टिक गया है, जो वर्दी पहनने की पहली अनिवार्य शर्त होती है।
क्या है पूरा विवाद?
आरोपों के मुताबिक, तहसीलदार शैलेंद्र शर्मा ने अपनी पत्नी ख्याति मिश्रा को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में न केवल आर्थिक मदद दी, बल्कि खुद नोट्स बनाकर उन्हें DSP की कुर्सी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन, जैसे ही सफलता मिली, रिश्तों की डोर कमजोर पड़ने लगी।
विवाद का मुख्य बिंदु अब व्यक्तिगत नहीं, बल्कि तकनीकी हो गया है:
आरोप: पति का दावा है कि ख्याति मिश्रा की लंबाई निर्धारित मापदंड (165 सेमी) से 2 सेंटीमीटर कम है।
दावा: पति ने आरोप लगाया है कि चयन के समय मिलीभगत कर लंबाई के आंकड़ों में हेरफेर की गई थी।
कानूनी लड़ाई: यह मामला अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की दहलीज पर है, जहां पति ने पत्नी की लंबाई दोबारा सरकारी मेडिकल बोर्ड से नपवाने की मांग की है।
ज्योति मौर्य कांड’ की यादें हुईं ताजा
सोशल मीडिया पर लोग इस मामले की तुलना उत्तर प्रदेश के चर्चित ‘ज्योति मौर्य कांड’ से कर रहे हैं। हालांकि, यहाँ मामला थोड़ा अलग है। यहाँ पति केवल बेवफाई का आरोप नहीं लगा रहा, बल्कि सीधे तौर पर फर्जीवाड़े’ की बात कर रहा है।
“पति शेलेंन्द्र शर्मा मैंने नोट्स बनाए, पढ़ाया और अधिकारी बनाया। अब पता चला कि चयन ही गलत आधार पर हुआ था।”
पत्नी (DSP ख्याति) |इसे मानसिक प्रताड़ना और चरित्र हनन का प्रयास बताया जा रहा है। (मामला कोर्ट में होने के कारण आधिकारिक बयान सुरक्षित)




