मझौली जमीन विवाद में बड़ा मोड़: अपर आयुक्त कोर्ट ने SDO और तहसीलदार के आदेश किए निरस्त; अब नए सिरे से होगी विस्तृत जांच

 खसरा नंबर 109 की 0.283 हेक्टेयर भूमि के नामांतरण पर अपर आयुक्त का सख्त रुख: बिना गहन पड़ताल आदेश पारित करना विधिसंगत नहीं

• कोर्ट में पेश हुए 1937 का स्कूल सर्टिफिकेट और 1956 के खसरे; तहसीलदार मझौली को गुण-दोष के आधार पर फैसला करने के निर्देश

मझौली/ जबलपुर 

मझौली तहसील अंतर्गत ग्राम मझौली के बहुचर्चित खसरा नंबर 109 (रकबा 0.283 हेक्टेयर) के भूमि विवाद में राजस्व न्यायालय से बड़ा फैसला सामने आया है। न्यायालय अपर आयुक्त, जबलपुर संभाग ने अधीनस्थ राजस्व अदालतों की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां पाते हुए अनुविभागीय अधिकारी (SDO राजस्व) सिहोरा और तहसीलदार मझौली दोनों के पूर्व आदेशों को एक झटके में निरस्त कर दिया है।

अपर आयुक्त अमर बहादुर सिंह ने प्रकरण (क्रमांक 0229/अपील/2026-27) की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि स्वामित्व और वंशावली जैसे जटिल विवादों का निपटारा केवल सतही या तकनीकी आधार पर नहीं किया जा सकता। कमिश्नर कोर्ट ने प्रकरण को वापस तहसीलदार मझौली के न्यायालय में रिमांड (प्रत्यावर्तित) करते हुए निर्देश दिए हैं कि दोनों पक्षों से आवश्यक साक्ष्य लेकर विधिवत जांच की जाए और गुण-दोषों के आधार पर नया आदेश पारित हो।

विवाद की पृष्ठभूमि: रजिस्ट्री से कमिश्नर कोर्ट तक का सफर

 * रजिस्ट्री व पहला नामांतरण: जय साहू (पिता रामजी साहू) ने 5 दिसंबर 2024 को रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के जरिए विक्रेतागण सुरेंद्र राय, राघवेंद्र राय, मीना राय, आशारानी राय और उषा राय से खसरा नंबर 109 की भूमि खरीदी थी। इसके आधार पर तहसीलदार मझौली ने 10 जनवरी 2025 को नामांतरण स्वीकार कर जय साहू का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने का आदेश दिया।

 * SDO कोर्ट का फैसला: इस नामांतरण के खिलाफ चंद्रिका प्रसाद (पिता राजाराम लोधी) ने SDO सिहोरा के समक्ष अपील की। उनका दावा था कि राघवेंद्र राय ने खुद को प्रेमलाल लोधी का पुत्र दर्शाकर रिकॉर्ड में गलत तरीके से नाम दर्ज कराया है, इसलिए मूल स्वत्व न होने से यह विक्रय अवैध है। SDO कोर्ट ने 18 जून 2026 को तहसीलदार द्वारा इश्तहार जारी न करने की प्रक्रियागत खामी मानते हुए नामांतरण रद्द कर दिया।

 * द्वितीय अपील: SDO के आदेश को चुनौती देते हुए क्रेता जय साहू व विक्रेता पक्ष ने म.प्र. भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 44(2) के तहत अपर आयुक्त कोर्ट में अपील दायर की।

कमिश्नर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘बिना जांच फैसला देना विधिसम्मत नहीं‘

अपील की सुनवाई के दौरान अपीलार्थी पक्ष की ओर से पुराने अभिलेख पेश किए गए। इनमें वर्ष 1956-57 से 1958-59 तक के पांचसाला खसरे (जिसमें प्रेमलाल वल्द बुखई का नाम दर्ज है), 3 मार्च 1937 का प्राइमरी स्कूल सर्टिफिकेट (जिसमें प्रेमलाल वल्द बुखई, जाति कलार दर्ज है) और बैंक पासबुक शामिल थे।

अपर आयुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि:

 * मूल विवाद की अनदेखी: उत्तरवादी चंद्रिका प्रसाद ने वंशावली और स्वामित्व को लेकर जो गंभीर आपत्तियां उठाई थीं, SDO कोर्ट ने उन बिंदुओं पर कोई ठोस या विस्तृत जांच नहीं कराई।

 * प्रक्रियागत खामी पर आदेश गलत: केवल इश्तहार प्रकाशन न होने की तकनीकी बात कहकर सीधे आदेश निरस्त कर देना न्यायसंगत नहीं था, जबकि विवाद के मूल तथ्यों की पड़ताल जरूरी थी।

अब क्या होगा आगे?

अपर आयुक्त ने 30 सितंबर 2026 को आदेश पारित कर SDO सिहोरा (आदेश दिनांक 18.06.2026) और तहसीलदार मझौली (आदेश दिनांक 10.01.2025) के फैसलों को शून्य घोषित कर दिया।

अब पूरी फाइल पुनः तहसीलदार मझौली की अदालत में पहुंचेगी, जहां:

 * दोनों पक्षों (जय साहू व विक्रेतागण बनाम चंद्रिका प्रसाद लोधी) से भूमि स्वामित्व, वंशावली और पुराने राजस्व दस्तावेजों के मूल साक्ष्य तलब किए जाएंगे।

 * मौके और रिकॉर्ड की विस्तृत वैधानिक जांच के बाद तहसीलदार को मामले का नए सिरे से अंतिम निराकरण करना होगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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