₹234 करोड़ की उड़ान और ₹100 करोड़ का सियासी महल: बदहाल स्कूलों-अस्पतालों के बीच एमपी में खर्च की प्राथमिकताओं पर घमासान

 ग्वालियर में 2021 के क्रैश के बाद आया ‘बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500’; सालाना ₹2 करोड़ सिर्फ बीमा प्रीमियम पर होंगे खर्च

 * राजधानी में आकार ले रहा हाईटेक भाजपा दफ्तर; विपक्ष बोला— जब सरकारी स्कूलों में बिजली-शौचालय नहीं, तब यह फिजूलखर्ची क्यों?

 * सरकार की दलील— किराए पर करोड़ों लुटाने से बेहतर है स्थायी विमान; पार्टी बोली— संगठन का खर्च कार्यकर्ताओं के सहयोग से

भोपाल

मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों ‘सरकारी खजाना’ और ‘सत्ता की प्राथमिकताएं’ चर्चा के केंद्र में हैं। एक तरफ जहां राजधानी भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री व वीवीआईपी मूवमेंट के लिए करीब ₹234 करोड़ की लागत से खरीदा गया अत्याधुनिक ‘बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500’ बिजनेस जेट उतर चुका है, वहीं शहर के प्राइम लोकेशन पर लगभग ₹100 करोड़ की लागत से भारतीय जनता पार्टी का आधुनिक प्रदेश कार्यालय तेजी से आकार ले रहा है।

सैकड़ों करोड़ के इन हाई-प्रोफाइल खर्चों ने राज्य की प्राथमिकताओं को लेकर एक तीखी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय बहस छेड़ दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जिस प्रदेश पर पौने चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है और जहां दूरदराज के ग्रामीण स्कूलों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं का अकाल है, वहां क्या यह चकाचौंध जनहित के अनुकूल है?

आसमान छूता खर्च: क्यों खरीदा गया ₹234 करोड़ का विमान?

राज्य के विमानन बेड़े में शामिल हुआ नया ‘बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500’ दुनिया के सबसे आधुनिक और लग्जरी बिजनेस जेट्स में गिना जाता है।

 * लागत और मेंटेनेंस: इस जेट की खरीद करीब ₹234 करोड़ में हुई है। विमान के जोखिम कवर के लिए करीब ₹268 करोड़ का मूल्यांकन किया गया है, जिसका सालाना बीमा प्रीमियम ही लगभग ₹2 करोड़ बैठेगा। इसके रखरखाव, हैंगर शुल्क और क्रू पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी करोड़ों में होगा।

 * सरकार का पक्ष: शासन के सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मई 2021 में ग्वालियर में सरकारी ‘बीचक्राफ्ट किंग एयर’ विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद से राज्य के पास अपना कोई फिक्स्ड-विंग वीवीआईपी जेट नहीं था। बीते तीन वर्षों में मुख्यमंत्री और अतिविशिष्ट दौरों के लिए निजी कंपनियों से चार्टर्ड प्लेन किराए पर लिए जाते रहे, जिस पर सरकारी खजाने से भारी-भरकम राशि खर्च हो रही थी। सरकार का दावा है कि भौगोलिक दृष्टि से देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य में आपातकालीन स्थिति, आपदा प्रबंधन, निवेश सम्मेलनों और त्वरित प्रशासनिक निगरानी के लिए यह खरीद लंबी अवधि में किफायती और सुरक्षित विकल्प है।

₹100 करोड़ का पार्टी दफ्तर: विपक्ष के निशाने पर ‘सियासी ठाठ’

विमान खरीद के साथ ही भोपाल में बन रहा भाजपा का नया सात मंजिला प्रदेश कार्यालय भी विपक्ष के निशाने पर आ गया है। आधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम, डिजिटल वॉर रूम, मीडिया सेंटर और अति-लग्जरी सुइट्स से लैस इस भवन पर करीब ₹100 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।

कांग्रेस और सामाजिक संगठनों ने दोनों मामलों को एक साथ जोड़ते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश जब गंभीर वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहा है, तब सत्ताधारी दल का ध्यान जनता की तकलीफों से ज्यादा अपनी सुख-सुविधाओं और भव्यता पर टिका है। हालांकि, भाजपा का स्पष्ट कहना है कि पार्टी कार्यालय का निर्माण कार्यकर्ताओं के सहयोग और संगठन के आंतरिक फंड से हो रहा है, जिसका राज्य के बजट या जनता के टैक्स के पैसे से कोई सरोकार नहीं है।

जमीनी हकीकत: चमक-दमक के पीछे छूटती बुनियादी जरूरतें

विपक्ष और नीति विश्लेषकों का तर्क है कि मसला सिर्फ कानूनन सही या गलत होने का नहीं, बल्कि ‘नैतिक प्राथमिकताओं’ का है। प्रदेश के सामाजिक संकेतकों पर नजर डालें तो कई गंभीर विरोधाभास सामने आते हैं:

 * शिक्षा व्यवस्था का संकट: प्रदेश के कई ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के सरकारी स्कूलों में आज भी एकल शिक्षक व्यवस्था लागू है। हजारों स्कूलों में अलग शौचालय, शुद्ध पेयजल और बिजली कनेक्शन का अभाव है। बारिश के दिनों में टपकती छतों के नीचे बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं।

 * स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ताहाली: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के 40% से अधिक पद खाली पड़े हैं। सोनोग्राफी और वेंटिलेटर जैसी मशीनें तकनीकी कर्मचारियों के अभाव में धूल फांक रही हैं।

 * कर्ज का पहाड़: राज्य पर लगातार बढ़ता वित्तीय भार विकास कार्यों और पूंजीगत व्यय के लिए बजट आवंटन को सीमित कर रहा है।

आंकड़े जो सोचने पर मजबूर करते हैं

पैमाना | जमीनी स्थिति / आंकड़ा |

नया सरकारी जेट | ₹234 करोड़ (खरीद) + ₹2 करोड़ (सालाना बीमा प्रीमियम) |

नया भाजपा प्रदेश दफ्तर | ₹100 करोड़ (अनुमानित निर्माण लागत) |

प्रदेश पर कुल कर्ज | ₹3.75 लाख करोड़ से अधिक |

 स्वास्थ्य एवं शिक्षा का हाल | ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों के 40%+ पद रिक्त; कई प्राथमिक शालाओं में बुनियादी सुविधाओं की दरकार |

जनता की अदालत में सवाल: विकास की परिभाषा क्या?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशासनिक गतिशीलता और सुरक्षा के नाम पर अत्याधुनिक संसाधन जुटाना किसी भी सरकार का विशेषाधिकार हो सकता है, लेकिन जब समाज का एक बड़ा तबका बुनियादी सुविधाओं—सड़क, पानी, इलाज और रोजगार—के लिए संघर्ष कर रहा हो, तब ऐसे बड़े खर्च जनता के बीच असंतोष को जन्म देते हैं।

अब सवाल यह है कि लोकतंत्र में शासन की पहचान उसकी भव्य इमारतों और महंगे विमानों से तय होगी, या फिर अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक तक पहुंचने वाली सस्ती शिक्षा और बेहतर इलाज से? आने वाले समय में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर चुनावी चौपालों तक गूंजता दिखाई देगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

Latest News

Stay Connected

0FansLike
30FollowersFollow
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Most View