अंतिम सफर में भी घोर यातना: शाहपुरा-भिटौनी के वार्ड 15 में बदहाल श्मशान घाट, घुटने भर कीचड़ में कंधों पर निकल रहीं अर्थियां

प्रशासनिक उपेक्षा की इंतहा: आजादी के दशकों बाद भी नसीब नहीं हुआ एक पक्का मुक्तिधाम, खुले आसमान तले दाह संस्कार को मजबूर परिजन

 * व्यवस्था पर तीखा प्रहार: “विकास के दावों के बीच अंतिम विदाई का यह अपमान असहनीय” — सपा प्रदेश सचिव आशीष मिश्रा ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

 शाहपुरा (जबलपुर)

मध्य प्रदेश शासन के तमाम दावों और ‘स्मार्ट विलेज-टाउन’ की कागजी योजनाओं की जमीनी हकीकत बरगी विधानसभा क्षेत्र के शाहपुरा-भिटौनी में तार-तार हो रही है। तहसील शाहपुरा अंतर्गत वार्ड क्रमांक 15 बेलखारवा (बेलहरवा) क्षेत्र में मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहाँ जीवन की अंतिम यात्रा भी प्रशासनिक संवेदनहीनता और बदहाली की भेंट चढ़ रही है। मुक्तिधाम के नाम पर यहाँ न तो कोई पक्का चबूतरा है, न बारिश-धूप से बचने के लिए शेड, और न ही श्मशान तक पहुँचने के लिए एक अदद सड़क।

गंदगी और दलदल से होकर गुजरती है अंतिम यात्रा

स्थानीय ग्रामीणों द्वारा साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों ने व्यवस्था की बदहाली को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। श्मशान घाट तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह दलदल और कीचड़ में तब्दील हो चुका है। बारिश के मौसम में स्थिति अत्यंत विकराल हो जाती है, जब शोक संतप्त परिजनों को अपने प्रियजन की पार्थिव देह को कांधे पर साधते हुए घुटने भर कीचड़ और फिसलन से जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ता है। कई बार संतुलन बिगड़ने से शव के गिरने का खतरा तक बन जाता है, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक और शर्मनाक है।

न शेड, न पानी, न चबूतरा; खुले में जलती हैं चिताएं

इस वार्ड में बुनियादी सुविधाओं का आलम यह है कि अंतिम संस्कार के लिए कोई औपचारिक ढांचा मौजूद ही नहीं है। दाह-संस्कार के लिए चबूतरा न होने के कारण लोगों को जहाँ सूखी या खाली जगह मिलती है, वहीं खुले मैदान में लकड़ी सजाकर अंतिम संस्कार करना पड़ता है। बारिश होने पर चिता को भीगने से बचाने का कोई साधन नहीं है। इसके अलावा अंतिम क्रिया के दौरान परिजनों के बैठने के लिए शेड, पीने का पानी और प्रकाश (बिजली) जैसी प्राथमिक जरूरतें भी पूरी तरह नदारद हैं।

आक्रोश: इंसानियत और गरिमा का खुला मखौल

क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्होंने नगर परिषद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कई बार मुक्तिधाम निर्माण की गुहार लगाई, लेकिन आज तक केवल कोरे आश्वासन ही मिले। इस संवेदनशील मामले पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव आशीष मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाते हुए शासन-प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।

 “एक तरफ सरकार हर मंच से विकास और गरिमापूर्ण जीवन के ढोल पीटती है, दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि इंसान को सम्मानजनक अंतिम विदाई तक नसीब नहीं हो रही। बारिश में शव को कंधे पर उठाकर कीचड़ से गुजरना गरीब और आम जनता के आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार है। यह केवल एक वार्ड की समस्या नहीं, बल्कि तंत्र की मृत हो चुकी संवेदनाओं का जीवंत प्रमाण है।”

— आशीष मिश्रा, प्रदेश सचिव, समाजवादी पार्टी (म.प्र.)

तत्काल निर्माण की मांग, आंदोलन की सुगबुगाहट

सपा प्रदेश सचिव ने जबलपुर जिला प्रशासन और नगर परिषद शाहपुरा से दो-टूक मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारी अविलंब मौके का मुआयना करें। उन्होंने मुक्तिधाम योजना के तहत वार्ड 15 में तत्काल पक्का पहुँच मार्ग, कवर्ड शेड, दाह-संस्कार चबूतरा, पानी और प्रकाश व्यवस्था स्वीकृत कर निर्माण कार्य शुरू करने का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि जनभावनाओं से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया गया, तो स्थानीय जनता को लामबंद कर नगर परिषद और तहसील कार्यालय का घेराव कर उग्र जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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