एसबीआई मझौली में बड़ा बैंकिंग फर्जीवाड़ा या गंभीर लापरवाही? क्लीयरिंग दिखाकर ग्राहक को थमाया ₹5.80 लाख कैश, महीने भर बाद खाते में जबरन रिकवरी डाल किया माइनस

 शाखा प्रबंधक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल: बिना पुख्ता वेरिफिकेशन के कैसे पास हुआ हाई-वैल्यू कैश विथड्रॉल?

 * खाताधारक पर दोहरी मार: बैंक के भरोसे पर देनदार को लौटाए जमीन के बंधक दस्तावेज, अब ₹5.80 लाख की रकम और कानूनी साक्ष्य दोनों डूबे

 * आरबीओ जबलपुर में शिकायत दर्ज; 15 दिन में न्याय न मिलने पर आरबीआई लोकपाल, सीबीआई और विजिलेंस जांच की दो-टूक चेतावनी

मझौली (जबलपुर)।

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मझौली शाखा (ब्रांच कोड: 12166) में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी और संदिग्ध रिकवरी प्रक्रिया का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधन ने पहले तो खाताधारक के खाते में चेक क्लीयर दर्शाकर ₹5.80 लाख का बाकायदा नकद भुगतान कर दिया, लेकिन ठीक 29 दिन बाद अपनी आंतरिक लेखा खामियों (BGL Discrepancy) को छुपाने के लिए ग्राहक के खाते में बैक-डेटेड रिकवरी डालकर उसे जबरन माइनस में धकेल दिया।

इस मनमानी और दोषपूर्ण सेवा (डिफिशिएंसी इन सर्विस) के खिलाफ पीड़ित उपभोक्ता ने एसबीआई के क्षेत्रीय व्यवसाय कार्यालय-2 (RBO-2), प्रशासनिक कार्यालय जबलपुर के क्षेत्रीय प्रबंधक व जांच अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर शाखा प्रबंधक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने और संपूर्ण राशि मय ब्याज लौटाने की गुहार लगाई है।

खाते में दिखी रकम, शाखा से बाकायदा हुआ नकद भुगतान

मामला बचिया तिराहा, मझौली निवासी खाताधारक धर्मेन्द्र कुमार साहू (खाता क्र. 30825764976) से जुड़ा है। शिकायती आवेदन के अनुसार, उनके खाते में 26 और 30 सितंबर 2025 को दो अलग-अलग चेकों (क्र. 064228 राशि ₹4,90,000 एवं क्र. 076819 राशि ₹90,000) के माध्यम से कुल ₹5,80,000 “बाय क्लीयरिंग / चेक सीबीआई” क्रेडिट दर्ज किया गया।

खाते में वैध बैलेंस दिखने के बाद खाताधारक ने 1 अक्टूबर 2025 को चेक क्र. 940866 के जरिए ₹5,80,000 की नकद निकासी (Cash Withdrawal) की। एसबीआई के नियमों के मुताबिक इतनी बड़ी रकम का भुगतान बिना शाखा प्रबंधक अथवा अधिकृत पासिंग अधिकारी के सीबीएस (CBS) ऑथराइजेशन और वाउचर वेरिफिकेशन के संभव ही नहीं है। शाखा प्रबंधन ने हरी झंडी देकर उपभोक्ता को नकद राशि सौंप दी।

30 दिन की चुप्पी के बाद ‘BGL मिलान’ का खेल, खाता माइनस

हैरानी की बात यह है कि करीब एक महीने तक बैंक प्रबंधन पूरी तरह शांत बैठा रहा। 29 अक्टूबर 2025 को अचानक बिना किसी पूर्व सूचना, कारण बताओ नोटिस या विधिक प्रक्रिया के खाताधारक के खाते से ₹4,90,000 और ₹90,000 की दोतरफा डेबिट प्रविष्टियां डाल दी गईं। विवरण में दर्ज किया गया—’BGL मिलान / CHQ RETURN RECOVERY’। इसके चलते उपभोक्ता का खाता अचानक लाखों रुपये माइनस में चला गया।

इतना ही नहीं, 1 नवंबर 2025 को उक्त चेकों के एवज में ‘फंड्स इंसफिशिएंट’ की इंट्री कर ₹177-₹177 का बाउंस चार्ज भी काट लिया गया। खाताधारक का सीधा आरोप है कि जब चेक 1 नवंबर को बाउंस दिखाए जा रहे हैं, तो 26 सितंबर को क्लियरिंग क्रेडिट कैसे दर्ज हुई? और यदि आरबीआई सेटलमेंट अधूरा था, तो 1 अक्टूबर को भुगतान पास करने वाले जिम्मेदार अधिकारी कौन थे? यह पूरा घटनाक्रम शाखा स्तर पर गंभीर रिकॉर्ड हेराफेरी और अपनी चूक दबाने के प्रयास की ओर इशारा करता है।

विश्वास की कीमत: रकम डूबी, हाथ से निकले बंधक दस्तावेज

इस कथित लापरवाही ने उपभोक्ता को अपूरणीय आर्थिक और कानूनी संकट में झोंक दिया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह रकम उन्हें एक देनदार से अपनी पुरानी उधारी के रूप में वसूलनी थी। सुरक्षा गारंटी के तौर पर देनदार की संपत्ति के मूल दस्तावेज और स्टांप पेपर उपभोक्ता के पास बंधक रखे थे।

सरकारी बैंक द्वारा खाते में राशि जमा दिखने और शाखा प्रबंधक द्वारा भुगतान अधिकृत किए जाने पर उपभोक्ता ने बैंक के आधिकारिक कृत्य पर पूर्ण विश्वास किया और कर्ज चुकता मानकर देनदार की संपत्ति के मूल दस्तावेज वापस लौटा दिए। अब बैंक द्वारा जबरन रिकवरी किए जाने से उपभोक्ता की ₹5.80 लाख की रकम भी डूब गई और देनदार के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने वाले मूल दस्तावेज भी हाथ से निकल गए।

जांच के घेरे में शाखा प्रबंधन: इन सवालों के मांगे जवाब

शिकायतकर्ता ने क्षेत्रीय प्रबंधक से निष्पक्ष जांच दल गठित कर मुख्य बिंदुओं पर जांच की मांग की है:

 * यूजर आईडी लॉग ऑडिट: 1 अक्टूबर 2025 को ₹5.80 लाख का हाई-वैल्यू कैश भुगतान किस शाखा प्रबंधक/अधिकारी की सीबीएस आईडी से अधिकृत (Authorize) किया गया?

 * सीटीएस क्लीयरिंग रिपोर्ट: 26 सितंबर को चेक किस सीटीएस बैच से भेजे गए और नेशनल क्लीयरिंग हाउस (NCH) से रिटर्न रिपोर्ट किस तारीख को प्राप्त हुई?

 * बीजीएल इंटरनल ऑडिट: 29 अक्टूबर को व्यक्तिगत बचत खाते से इंटरनल बीजीएल मिलान करने के लिए क्या क्षेत्रीय कार्यालय (RBO) से सक्षम तकनीकी व विधिक अनुमति ली गई थी?

 * वाउचर के भौतिक हस्ताक्षर: 1 अक्टूबर के नकद निकासी वाउचर पर किस पासिंग अथॉरिटी के भौतिक हस्ताक्षर दर्ज हैं?

15 दिन का अल्टीमेटम, कानूनी जंग की तैयारी

पीड़ित खाताधारक ने दो-टूक कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं कि बैंक की आंतरिक तकनीकी या परिचालनगत गलतियों (Operational Failures) की सजा किसी निर्दोष ग्राहक को नहीं दी जा सकती। उन्होंने ₹5.80 लाख की अविलंब वापसी और 1 अक्टूबर 2025 से क्षतिपूर्ति की तिथि तक व्यावसायिक ब्याज की मांग की है।

उपभोक्ता ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिवस के भीतर मामले का पारदर्शी निराकरण कर शिकायत संदर्भ संख्या (Complaint Reference Number) जारी नहीं की गई, तो वे आरबीआई के एकीकृत लोकपाल (RB-IOS), उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, राज्य पुलिस और एसबीआई विजिलेंस व सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा में औपचारिक वाद दायर करेंगे।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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