मझौली वन चौकी बनी माफिया का अभयारण्य: नाक के नीचे पोकलेन से छलनी हो रहा जंगल, रेंजर व बीट प्रभारी के संरक्षण पर फूटा गुस्सा

चौकी के 500 मीटर के दायरे में दिन-रात गरज रहीं मशीनें; बेखौफ दौड़ रहे 10-चक्का डंपर, कार्रवाई के नाम पर केवल खाली ट्रॉलियों की जब्ती का खेल

मझौली/सिहोरा

जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा का जिम्मा जिन कंधों पर है, वही अगर खनन सिंडिकेट के आगे नतमस्तक हो जाएं तो कुदरत का सीना छलनी होना तय है। सिहोरा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मझौली वन चौकी इन दिनों प्राकृतिक संपदा की पहरेदार नहीं, बल्कि खनन माफिया की सबसे मुफीद पनाहगाह बन चुकी है। वन चौकी की चारदीवारी से महज 500 मीटर के दायरे में दिन के उजाले से लेकर रात के सन्नाटे तक भारी-भरकम पोकलेन व जेसीबी मशीनें बेधड़क जंगल को खोद रही हैं, लेकिन वन अमले की आंखों पर कथित ‘मासिक चढ़ावे’ की पट्टी बंधी हुई है।

सांठगांठ का सिंडिकेट: चौकी के सामने से दौड़ते हैं ओवरलोड डंपर

क्षेत्र में चल रहा यह अवैध कारोबार किसी से छिपा नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का सीधा आरोप है कि यह पूरी खुली लूट बीट प्रभारी और परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) की सीधी सरपरस्ती में जारी है।

हैरानी की बात यह है कि जिस वन मार्ग से आम ग्रामीण अगर सूखी लकड़ियां या मवेशी लेकर भी निकले तो वनकर्मी डंडा लेकर खड़े हो जाते हैं, उसी रास्ते से मुरम, गिट्टी और पत्थरों से लदे 10-चक्का डंपर और ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली चौबीसों घंटे फर्राटा भरते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध वाहनों के सुरक्षित निकास के लिए बाकायदा बीट स्तर पर निगरानी रखी जाती है ताकि माफिया के काम में कोई अड़चन न आए।

“चौकी के ठीक सामने से रोज दर्जनों अवैध वाहन निकलते हैं। अमले को सब पता है, क्योंकि पूरा खेल सेट है। कोई ग्रामीण आवाज उठाए तो वनकर्मी उसे ही वन अपराध के झूठे केस में फंसाने और जेल भेजने की धमकी देते हैं।”

— नाम न छापने की शर्त पर क्षेत्रीय ग्रामीण

खजाने पर डाका, 30 फीट गहरे गड्ढों से पर्यावरण तबाह

मझौली वन क्षेत्र में हो रही इस बेतहाशा खुदाई से क्षेत्र को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है:

 * कुदरत पर वार: मशीनों से 20 से 30 फीट गहरे अनियंत्रित खदाननुमा गड्ढे खोद दिए गए हैं। हरी-भरी पहाड़ियों का वजूद खत्म हो चुका है, जिससे वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करने को मजबूर हैं। साथ ही भू-जल स्तर खतरनाक स्तर तक गिर रहा है।

 * रॉयल्टी की खुली चोरी: बिना किसी वैध खनन पट्टे, अनुमति या पर्यावरण मंजूरी (EC) के रोजाना सैकड़ों टन खनिज ठिकाने लगाया जा रहा है। शासन को हर महीने लाखों रुपये की रॉयल्टी का चूना लग रहा है, जबकि यह काली कमाई सीधे माफिया और भ्रष्ट अफसरों की जेबों में जा रही है।

छापों से पहले ‘लीक’ होती है सूचना, कागजों में सिमटती कार्रवाई

जब भी स्थानीय स्तर पर विरोध बढ़ता है या मीडिया में खबरें आती हैं, सिहोरा वन अमला ‘जांच का आश्वासन’ देकर औपचारिकता पूरी कर लेता है। कार्रवाई के नाम पर अमला किसी लावारिस पड़े पुराने ट्रैक्टर या खाली ट्रॉली को जब्त कर वरिष्ठ अधिकारियों को कार्रवाई की रिपोर्ट भेज देता है।

हकीकत यह है कि किसी भी बड़ी कार्रवाई से चंद मिनट पहले खनन स्थल से पोकलेन और डंपर गायब हो जाते हैं। विभाग के अंदर से ही माफिया को रेड की पुख्ता लोकेशन और समय कौन लीक करता है, यह जांच का सबसे बड़ा विषय है।

स्थानीय नागरिकों की सीधी मांग:

 * मझौली वन चौकी के 5 किमी परिधि का तत्काल ड्रोन कैमरे से वीडियोग्राफी सर्वे कराया जाए ताकि खोदी गई जमीन का सही रकबा सामने आए।

 * संदेह के घेरे में आए बीट प्रभारी और रेंजर के सरकारी व निजी नंबरों की कॉल डिटेल (CDR) की उच्चस्तरीय जांच हो।

 * जबलपुर डीएफओ (DFO) स्वयं संज्ञान लेकर जिला स्तरीय विशेष उड़नदस्ते से औचक छापेमारी करवाएं और दोषियों पर एफआईआर दर्ज हो।

मझौली में प्रशासनिक संरक्षण में चल रही यह लूट अब बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है। यदि समय रहते जिला प्रशासन और वन विभाग के आला अधिकारियों ने इस गठजोड़ को नहीं तोड़ा, तो कागजों में दर्ज सिहोरा का यह हरा-भरा जंगल बहुत जल्द सिर्फ बंजर गड्ढों में तब्दील हो जाएगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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