काम हमारा, नाम और दाम किसी और का: भड़के रोजगार सहायकों ने कलेक्टर व CEO को सौंपा ज्ञापन

बिना लिखित आदेश और अतिरिक्त मानदेय के अन्य विभागों का काम करने से साफ इनकार

 * संयुक्त मोर्चा की चेतावनी: ‘विकसित भारत-जी राम जी’ के अलावा थोपे गए काम, तो होगा आर-पार का आंदोलन

जबलपुर

“पसीना बहाए रोजगार सहायक, और मलाई काटे कोई दूसरा!” इसी आक्रोश और वर्षों के शोषण के खिलाफ बुधवार को ग्राम रोजगार सहायक संघ संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश के बैनर तले रोजगार सहायकों ने मोर्चा खोल दिया। मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के नाम जबलपुर कलेक्टर तथा जिला पंचायत सीईओ को एक कड़क ज्ञापन सौंपते हुए सहायकों ने दो टूक चेतावनी दी कि जब तक राज्य स्तर से स्पष्ट आदेश और अतिरिक्त मानदेय का निर्धारण नहीं होता, तब तक वे मूल काम के अलावा किसी अन्य विभाग की बेगार नहीं करेंगे।

शासकीय आदेशों की धज्जियां उड़ाने का आरोप

ज्ञापन सौंपते हुए संगठन के पदाधिकारियों ने शासन के ही नियमों का आईना दिखाया। मोर्चा ने स्पष्ट किया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आदेश क्रमांक 3206 (दिनांक 19.10.2020) के बिंदु क्रमांक 4 में साफ लिखा है कि राज्य स्तर से विभाग की पूर्व लिखित सहमति के बिना ग्राम रोजगार सहायकों को किसी अन्य विभाग या योजना में संलग्न नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद धरातल पर स्थानीय स्तर पर मौखिक या मनमाने तरीके से सहायकों पर दूसरे विभागों के भारी-भरकम काम थोप दिए जाते हैं।

संगठन ने मांग उठाई कि यदि ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन 2026’ जैसी अन्य योजनाओं का काम रोजगार सहायकों से ही कराना अनिवार्य है, तो संबंधित विभाग पहले भोपाल स्थित राज्य स्तरीय वरिष्ठ कार्यालय से विधिवत अनुमति प्राप्त करे और ग्राम रोजगार सहायक के पदनाम का स्पष्ट उल्लेख करते हुए लिखित दिशा-निर्देश जारी करे।

धरातल पर पसीना कोई बहाए, श्रेय और प्रोत्साहन राशि डकारें दूसरे

सौंपे गए ज्ञापन में रोजगार सहायकों का सबसे बड़ा दर्द फूटा। संयुक्त मोर्चा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम स्तर पर योजनाओं को जमीन पर उतारने की सारी मशक्कत ग्राम रोजगार सहायक करते हैं, लेकिन जब काम पूरा होता है, तो उसकी वाहवाही और उपलब्धि का श्रेय दूसरे विभागों व अन्य कर्मचारियों के खाते में दर्ज हो जाता है। इतना ही नहीं, उस काम के बदले मिलने वाली प्रोत्साहन राशि व पारिश्रमिक भी दूसरे अधिकारी-कर्मचारी डकार जाते हैं, जबकि वास्तविक काम करने वाले रोजगार सहायक के हाथ सिर्फ खाली रह जाते हैं।

गाइडलाइन का हवाला: पहले तय हो पारिश्रमिक, तय समय में हो भुगतान

मोर्चा ने मध्य प्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद् भोपाल की मार्गदर्शिका 2025 (पत्र क्र. 1122, दिनांक 24.06.2025) के बिंदु क्रमांक 4 को रेखांकित करते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट प्रावधान है कि मनरेगा के अतिरिक्त किसी अन्य शासकीय योजना का कार्य करने पर रोजगार सहायक अतिरिक्त मानदेय/पारिश्रमिक पाने के हकदार हैं।

संगठन की दो-टूक मांगें:

 * ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (VB-G RAM G) योजना के अलावा किसी अन्य योजना में तभी काम लिया जाए, जब भोपाल मुख्यालय से इसकी आधिकारिक अनुमति हो।

 * काम सौंपने से पहले अतिरिक्त मानदेय व पारिश्रमिक की दरें आधिकारिक रूप से तय की जाएं।

 * निर्धारित मानदेय का भुगतान एक निश्चित समय-सीमा के भीतर सीधे रोजगार सहायकों के खातों में सुनिश्चित हो।

चेतावनी: दबाव बनाया तो ठप करेंगे काम

संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेताया है कि यदि बिना लिखित अनुमति और बिना अतिरिक्त पारिश्रमिक के रोजगार सहायकों पर अन्य योजनाओं का दबाव बनाया गया, तो पूरे जिले में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा और योजनाओं का काम ठप कर दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही शासन-प्रशासन की होगी।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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