सैनिक छावनी की बेशकीमती भूमि पर कब्जे की कोशिश नाकाम: हाईकोर्ट ने 10 हजार जुर्माने के साथ खारिज की याचिका

अदालत की दो टूक: सिविल कोर्ट में मामला लंबित रहते हाईकोर्ट आना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग, पैरेलल रिलीफ की अनुमति नहीं

स्लीमनाबाद (कटनी)।

स्लीमनाबाद स्थित सरकारी अभिलेखों में दर्ज ‘सैनिक छावनी’ की करोड़ों रुपये मूल्य की 2.72 हेक्टेयर भूमि पर दावेदारी और अतिक्रमण का मामला हाईकोर्ट की चौखट पर औंधे मुंह गिर गया। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ताओं पर कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग का दोषी ठहराया और 10 हजार रुपये की कॉस्ट (जुर्माना) ठोकते हुए रिट याचिका सीधे खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि जुर्माने की यह राशि राज्य शासन के विविध शुल्क (Fines and Forfeitures) मद में जमा की जाएगी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने रिट याचिका (क्रमांक 49345/2025 – निसार बेग एवं अन्य बनाम म.प्र. शासन) पर सुनवाई करते हुए दो टूक व्यवस्था दी कि जब एक ही विषय पर सिविल कोर्ट में कार्यवाही चल रही हो, तब उसी राहत के लिए हाईकोर्ट में समानांतर याचिका दाखिल करना न्याय प्रक्रिया का सीधा दुरुपयोग है।

कब्रिस्तान विस्तार की आड़ में सरकारी छावनी की जमीन पर नजर

पूरा विवाद स्लीमनाबाद के खसरा नंबर 53 और 54 को लेकर है। याचिकाकर्ताओं ने राजस्व रिकॉर्ड में कब्रिस्तान मद में दर्ज खसरा नंबर 53 (रकबा 0.400 हेक्टेयर) के संरक्षण की मांग करते हुए याचिका लगाई थी। उनका तर्क था कि कब्रिस्तान में जमीन कम पड़ने के कारण वे उससे सटी खसरा नंबर 54 (रकबा 2.72 हेक्टेयर) की भूमि पर भी शव दफनाने लगे हैं।

दूसरी ओर, सरकारी राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर 54 पूरी तरह से ‘मध्यप्रदेश शासन – सैनिक छावनी’ के नाम पर सुरक्षित दर्ज है। जब इस बेशकीमती छावनी भूमि पर अवैध कब्जे की बात सामने आई, तो तहसीलदार स्लीमनाबाद ने पांच सदस्यीय प्रशासनिक समिति गठित कर जमीन खाली करने का बेदखली नोटिस थमा दिया था।

सिविल कोर्ट में खारिज हुआ था अंतरिम आवेदन, फिर पहुंचे हाईकोर्ट

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि याचिकाकर्ता पहले ही सिविल न्यायालय में मूल वाद (दावा) पेश कर चुके हैं। वहां सीपीसी के आदेश 39 नियम 1 व 2 के तहत अंतरिम स्थगन (इंजंक्शन) मांगा गया था। सिविल कोर्ट ने गुण-दोष के आधार पर विचार करते हुए उनकी अंतरिम राहत की अर्जी निरस्त कर दी थी।

निचली अदालत से झटका लगने के बाद याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया। युगलपीठ ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब संबंधित फोरम पहले ही सुनवाई कर अंतरिम राहत खारिज कर चुका है, तो तथ्यों को घुमाकर हाईकोर्ट में रिट दाखिल करना किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

विहिप और बजरंग दल ने फैसले का किया स्वागत, प्रशासन की कार्रवाई का रास्ता साफ

तहसीलदार स्लीमनाबाद की ओर से जब सैनिक छावनी की जमीन से अतिक्रमण हटाने की शुरुआत हुई थी, तब ग्राम पंचायत स्लीमनाबाद के आमजन और हिंदू संगठन सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा के लिए लामबंद हो गए थे। हाईकोर्ट के इस सख्त फैसले के बाद स्थानीय नागरिकों सहित विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए कड़ा सबक है जो सार्वजनिक और राष्ट्रीय महत्व की सैनिक छावनी भूमि पर अवैध दावा ठोकते हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब स्लीमनाबाद तहसील प्रशासन द्वारा सैनिक छावनी की पूरी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर सीमांकन व फेंसिंग कराने की राह पूरी तरह साफ हो गई है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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