मौत का हाईवे बनेगा सुरक्षित; कटनी-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शाम 5 बजे के बाद आवारा मवेशियों की ‘नो एंट्री’, कलेक्टर का हंटर चला!

नेशनल हाईवे-7 (कटनी-जबलपुर मार्ग) पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए यह खबर किसी बड़े लाइफ-सेवर से कम नहीं है।

कटनी

इस हाईवे पर शाम ढलते ही मौत बनकर बैठने वाले आवारा मवेशियों और बेजुबान गौवंश के कारण होने वाले खूनी हादसों को रोकने के लिए आखिरकार प्रशासन ने अपनी कुंभकर्णी नींद तोड़ दी है।

लगातार हो रही जनहानि, भारी जाम और जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कटनी कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने एक बेहद कड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। कलेक्टर के इस सख्त निर्देश के बाद जनपद पंचायत कटनी, रीठी, बड़वारा और पशु चिकित्सा विभाग के अमले में हड़कंप मच गया है।

शाम 5 बजे के बाद ‘ऑपरेशन क्लीन हाईवे’: सड़कें होंगी मवेशी-मुक्त

प्रशासन द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन के अनुसार, अब शाम 5 बजे के बाद कटनी-जबलपुर हाईवे पर किसी भी आवारा मवेशी या गौवंश के दिखने पर सख्त पाबंदी होगी। प्रशासन ने इसके लिए एक त्रिस्तरीय कार्ययोजना (Three-Tier Plan) तैयार की है:

 सड़कों पर सघन सर्च अभियान: शाम 5 बजते ही स्थानीय जनपद पंचायतों की टीमें और पुलिस बल हाईवे पर गश्त करेंगे। यदि कोई भी मवेशी सड़क के बीच या किनारे बैठा या घूमता पाया गया, तो उसे तुरंत ‘कस्टडी’ में लिया जाएगा।

 कांजी हाउस और अस्थायी गौशालाएं अलर्ट: हाईवे से हटाए गए मवेशियों को लावारिस छोड़ने के बजाय, प्रशासन द्वारा चिन्हित की गई अस्थायी गौशालाओं और कांजी हाउसों में सुरक्षित शिफ्ट किया जाएगा। इससे बेजुबान जानवरों को कड़कड़ाती ठंड, गर्मी या बारिश से भी राहत मिलेगी।

हादसों के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ मैनेजमेंट: इंसान और बेजुबान, दोनों के लिए ‘क्विक रिस्पांस’

इस प्रशासनिक आदेश की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें सिर्फ प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, बल्कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एक पुख्ता इमरजेंसी मेडिकल ग्रिड’ तैयार किया गया है।

त्वरित इलाज की गारंटी: यदि हाईवे पर कोई अप्रिय सड़क दुर्घटना होती है, तो ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के ठीक बाद का पहला घंटा) के भीतर घायल इंसान को नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

बेजुबानों के लिए 24/7 डॉक्टर्स तैनात: इसके समानांतर, सड़क हादसों में घायल होने वाले मवेशियों के इलाज के लिए सभी सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को ‘ऑन-कॉल’ 24 घंटे अलर्ट रहने को कहा गया है। घायल पशुओं को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी पशु उपचार केंद्र ले जाया जाएगा।

सुलगते सवाल: क्या कागजों से उतरकर जमीन पर दिखेगा असर?

कटनी प्रशासन की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन न्यूज़ नेटवर्क इस बदलाव के बीच कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी उठाता है:

 1. RTO और हाईवे अथॉरिटी की भूमिका: शाम 5 बजे के बाद मवेशी हटाने की जिम्मेदारी तो तय हो गई, लेकिन हाईवे पर तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग के कारण होने वाले हादसों पर आरटीओ (RTO) कब लगाम कसेगा?

 2. अस्थायी व्यवस्था या स्थायी समाधान?: कांजी हाउस और अस्थायी गौशालाओं में मवेशियों के चारे और पानी की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती होगी, ताकि ये मवेशी दोबारा सड़कों का रुख न करें।

कटनी जिला प्रशासन का यह कदम यह साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो प्रशासनिक तंत्र जनता की समस्याओं का त्वरित हल निकाल सकता है। यह आदेश न केवल कटनी-जबलपुर हाईवे को ‘एक्सीडेंट फ्री ज़ोन’ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि यह बेजुबान गौवंश के संरक्षण के प्रति भी एक मानवीय दृष्टिकोण है। अब पूरी नजर इस बात पर है कि धरातल पर बैठे अधिकारी इस आदेश का पालन कितनी ईमानदारी से करते हैं।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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