बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के बीच अस्पतालों में होने वाली संभावित अग्नि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है।
जबलपुर/मझौली
आज कलेक्टर श्री राघवेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में जिले की स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पतालों के सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा की गई।
शॉर्ट सर्किट रोकने के लिए इलेक्ट्रिकल ऑडिट अनिवार्य
दिल्ली में हाल ही में हुए एसी विस्फोट की घटना का हवाला देते हुए कलेक्टर श्री सिंह ने जिले के सभी अस्पतालों को अपने विद्युत उपकरणों और वायरिंग की तत्काल जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्मी में बिजली की खपत बढ़ने से शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए गुणवत्तापूर्ण वायरिंग और सही क्षमता के एमसीबी (MCB) का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
4 से 10 मई तक ‘फायर सेफ्टी वीक’
बैठक में अग्नि सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए बताया गया कि 4 मई से 10 मई तक ‘फायर सेफ्टी वीक’ मनाया जाएगा। इस दौरान सभी अस्पतालों में फायर मॉक ड्रिल आयोजित करना अनिवार्य होगा। कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा कि “आपातकालीन निकास (Emergency Exit) पर कोई भी सामान नहीं मिलना चाहिए, इन्हें हर समय बाधा रहित रखा जाए।”
पीएम राहत योजना का होगा विस्तार
पुलिस अधीक्षक श्री संपत उपाध्याय ने बैठक में पीएम राहत योजना पर चर्चा करते हुए निजी अस्पतालों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस योजना से जुड़ें ताकि गरीबों को इलाज मिल सके। यातायात पुलिस अधीक्षक श्रीमती अंजना ने भी अस्पतालों के पंजीयन की प्रक्रिया पर जोर दिया।
बैठक में नोडल अधिकारी डॉ. आदर्श बिश्नोई ने ‘कोड रेड’ जैसी आपातकालीन स्थितियों और फायर साइनेज की तकनीकी जानकारी साझा की। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




