दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता विजय, जिन्हें प्रशंसक प्यार से ‘थलपति’ बुलाते हैं, ने फिल्मी पर्दे से राजनीति के मैदान में कदम रखते ही इतिहास रच दिया है।
चेन्नई
आमतौर पर नेता जमीनी स्तर से शुरुआत कर दशकों बाद शीर्ष पद तक पहुँचते हैं, लेकिन विजय ने अपनी लोकप्रियता और सटीक रणनीति के दम पर सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल कर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
पलक झपकते ही बदली सत्ता की तस्वीर
विजय की राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के गठन के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वह राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव लाएंगे। लेकिन चुनाव परिणामों ने सबको चौंका दिया। विजय ने न केवल पारंपरिक राजनीतिक दलों के किलों को ढहाया, बल्कि पलक झपकते ही सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले ली। उनकी इस जीत को ‘सिनेमाई करिश्मा’ और ‘जनता के भरोसे’ का बेजोड़ संगम माना जा रहा है।
फिल्मी स्टाइल में पॉलिटिकल एंट्री
विजय का राजनीति में आना किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा रहा। उन्होंने अपनी जनसभाओं में जिस तरह से भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों को उठाया, उसने युवाओं और महिलाओं के बीच उन्हें एक मसीहा के रूप में स्थापित कर दिया। जानकारों का मानना है कि विजय ने एमजीआर और जयललिता जैसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए यह साबित कर दिया कि यदि जनता का साथ हो, तो अभिनेता से मुख्यमंत्री बनने का सफर बेहद छोटा हो सकता है।
चुनौतियों भरा होगा ‘मुख्यमंत्री’ का सफर
भले ही विजय ने सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पकड़ ली हो, लेकिन अब उनके सामने वास्तविक शासन की चुनौतियां हैं। जनता को दिए गए वादों को पूरा करना, राज्य की अर्थव्यवस्था को संभालना और अनुभवी विपक्षी नेताओं के हमलों का जवाब देना उनके लिए असली ‘अग्निपरीक्षा’ होगी।
यह केवल एक पद नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की उम्मीदों का बोझ है। मैं पर्दे का नायक था, अब जनता का सेवक हूँ।”
— मुख्यमंत्री विजय (पदभार ग्रहण करने के बाद




