“आवाज़ उठाओ, गंदगी हटाओ” – नगर परिषद मझौली की दीवारों पर सजे ये रंग-बिरंगे नारे पहली नजर में तो प्रशासन की सक्रियता का अहसास कराते हैं, लेकिन हकीकत इन शब्दों से कोसों दूर है।
मझौली (जबलपुर)
मझौली के वार्ड नंबर 14 में दीवारों पर लिखे ये शब्द कचरे के ढेरों के नीचे दबे नजर आ रहे हैं।
दिखावे की रंगत, हकीकत की बदबू
वार्ड नंबर 14 की दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में स्वच्छता का संदेश लिखा गया है, जो कागजों और दीवारों पर तो बहुत सुंदर दिखता है। मगर विडंबना देखिए, जिस दीवार पर सफाई की अपील है, उसी की जड़ में प्लास्टिक की थैलियों, सड़े हुए फलों और गंदे पानी का अंबार लगा है। वहां से उठती सड़ांध इन नारों का मजाक उड़ाती प्रतीत होती है।
जिम्मेदारी किसकी?
यह स्थिति केवल नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर ही नहीं, बल्कि जन-भागीदारी पर भी सवाल खड़े करती है।
प्रशासन:क्या केवल दीवारें रंग देने से शहर साफ हो जाएगा? कचरा संग्रहण और डंपिंग की उचित व्यवस्था कहाँ है?
जनता: क्या नारे केवल पढ़ने के लिए हैं? संदेश को जीवन में उतारना और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना हमारी भी जिम्मेदारी है।
नारों से नहीं, व्यवहार से आएगा बदलाव
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक हमारे कर्म और शब्द एक समान नहीं होंगे, तब तक “स्वच्छ मझौली” का सपना केवल दीवारों तक ही सीमित रहेगा। केवल हैशटैग और नारों से बदलाव नहीं आता; असली परिवर्तन तब दिखेगा जब दीवार के नीचे कचरा नहीं, बल्कि हरियाली या साफ रास्ता होगा।
“दीवारों पर लिखे नारे केवल शब्द नहीं, जिम्मेदारी का संदेश हैं। पर जब वही नारे गंदगी के बीच खो जाते हैं, तो उनकी अहमियत खत्म हो जाती है।”
वार्ड नंबर 14 के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि अति शीघ्र इस समस्या का समाधान किया जाए और स्वच्छता को केवल “नारेबाजी” तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारा जाए।




