नगर के मुख्य बाजार स्थित प्राचीन श्री राम जानकी मंदिर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।
मझौली (जबलपुर)
जबलपुर तिराहे के पास स्थित इस मंदिर की भव्यता अब केवल इतिहास के पन्नों तक सिमटती नजर आ रही है। मंदिर प्रशासन और शासन की अनदेखी के कारण यहाँ न केवल भवन जर्जर हो रहा है, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।
मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं ने बताया कि परिसर में पीने के पानी तक की उचित व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी के इस दौर में भक्तों को भटकना पड़ता है। इसके अलावा, मंदिर में प्रसाद के वितरण और उसकी व्यवस्था को लेकर भी भारी अव्यवस्था देखने को मिल रही है, जिससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँच रही है।
1.20 लाख की मासिक आय आखिर कहाँ?
मंदिर की संपत्ति से जुड़े 28 कमरे मेन मार्केट जैसे प्राइम लोकेशन पर होने के कारण करीब 1 लाख 20 हजार रुपए की मासिक आय देते हैं। इसके बावजूद मंदिर प्रांगण की हालत “खंडहर” जैसी हो गई है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी राशि का उपयोग कहाँ किया जा रहा है?
जर्जर भवन: मंदिर प्रांगण की छत और दीवारें अत्यंत कमजोर स्थिति में हैं।
पेयजल संकट: मंदिर परिसर में पानी की कोई स्थायी या स्वच्छ व्यवस्था नहीं है।
प्रसाद वितरण: प्रसाद और भोग की व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह उदासीन है।
अनदेखी: शासन-प्रशासन की ओर से मंदिर के संरक्षण के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है।
मझौली के निवासी शिवकुमार का कहना है कि यह मंदिर क्षेत्र की आस्था का केंद्र है, लेकिन प्रशासन इसे केवल आय का जरिया मान रहा है और सुविधाओं के नाम पर यहाँ शून्य काम हो रहा है।




