जनपद पंचायत मझौली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कटरा तागबैहर इन दिनों किसी विकास कार्य के लिए नहीं, बल्कि अपनी “रहस्यमयी अनुपस्थिति” के लिए चर्चा में है।
मझौली जबलपुर
शासन की योजनाओं को धरातल पर उतारने वाली यह पंचायत पिछले कई महीनों से बंद है। न यहाँ सचिव का ठिकाना है, न सरपंच का, और न ही सहायक सचिव का।
पंचायत की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब डाक विभाग द्वारा भेजी गई एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) की रजिस्ट्री बैरंग वापस लौट आई। 15 अप्रैल 2026 को भेजी गई इस रजिस्ट्री को लेकर डाक विभाग ने 30 अप्रैल को यह टिप्पणी दर्ज की कि “पंचायत कार्यालय बंद है और संबंधित अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं।” यह सीधे तौर पर सूचना के अधिकार अधिनियम की अवहेलना है।
पंचायत भवन पर ताला लटकने से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, वृद्धावस्था पेंशन, और मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं ठप पड़ी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी समस्याओं के लिए चक्कर काटकर थक चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
इस पूरे मामले पर जब जनपद पंचायत मझौली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा:
“ग्राम पंचायत का इस तरह बंद रहना और शासकीय डाक का वापस होना गंभीर लापरवाही है। यदि आरटीआई आवेदन जानबूझकर नहीं लिया गया है, तो यह अधिनियम का उल्लंघन है। हम संबंधित सचिव और सरपंच को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर रहे हैं। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
आरटीआई आवेदन का वापस होना यह संकेत देता है कि पंचायत प्रशासन वित्तीय अनियमितताओं या किसी अन्य जानकारी को छिपाने का प्रयास कर रहा है। आखिर ऐसी कौन सी फाइलें हैं जिन्हें जनता की नजरों से दूर रखने के लिए कार्यालय को ही “लापता” कर दिया गया? यह अब मझौली जनपद प्रशासन के लिए जांच का बड़ा विषय है।
ब्यूरो रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़




