भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर के बीच जबलपुर कलेक्टर द्वारा जिले में निजी बोरिंग खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
मझौली/जबलपुर
इस संबंध में सख्त धारा 144 के तहत आदेश जारी किए गए हैं। लेकिन मझौली क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में इन सरकारी आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस अवैध कार्य को रोकने के बजाय, क्षेत्र के हल्का पटवारी और ग्राम कोटवार कथित तौर पर साठगांठ कर इसे बढ़ावा दे रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि जबलपुर कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले में किसी भी तरह की नई बोरिंग बिना लिखित अनुमति के नहीं की जाएगी और उल्लंघन करने वालों पर एफआईआर दर्ज कर मशीन जब्त की जाएगी। बावजूद इसके, संबंधित क्षेत्र के पटवारी और कोटवार की रहस्यमयी चुप्पी के चलते, ग्रामीण इलाकों में रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी बोरिंग मशीनें गरज रही हैं।
क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि हल्का पटवारी और ग्राम कोटवार को अवैध बोरिंग की पल-पल की सूचना रहती है। वे जानते हैं कि बोरिंग कहाँ और कब होने वाली है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती। चर्चा आम है कि बिना इन जिम्मेदार कर्मचारियों के संरक्षण और “लेन-देन” के इतने बड़े स्तर पर अवैध कार्य संभव नहीं है। कोटवार को तो वैसे भी गाँव की हर हलचल पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी होती है, फिर भी वह खामोश है।
एक ओर शासन जल संरक्षण के लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ चला रहा है, वहीं दूसरी ओर पटवारी और कोटवार जैसे निचले स्तर के कर्मचारियों की लापरवाही और कथित मिलीभगत से भू-जल का अनियंत्रित दोहन जारी है। अगर इसी तरह अवैध बोरिंग होती रही, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
जागरूक नागरिकों ने जबलपुर कलेक्टर और एसडीएम मझौली से मांग की है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लिया जाए। केवल बोरिंग कराने वालों पर ही नहीं, बल्कि जानबूझकर लापरवाही बरतने वाले या मिलीभगत करने वाले हल्का पटवारी और ग्राम कोटवार के खिलाफ भी विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
ब्यूरो रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़ नेटवर्क




