समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूँ उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है।
जबलपुर
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने आदेश जारी कर जिले के सभी सरकारी और निजी गोदामों से गेहूँ की निकासी पर उपार्जन अवधि समाप्त होने तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
पुराने गेहूँ की ‘रीसाइकिलिंग’ पर लगेगा ब्रेक
प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ व्यापारी और बिचौलिए पुराने स्टॉक को नए गेहूँ के रूप में दिखाकर उपार्जन केंद्रों पर खपा रहे हैं। इस अवैध ‘रीसाइकिलिंग’ से:
सरकार को आर्थिक नुकसान होता है
असली किसानों का हक प्रभावित होता है
इसी को रोकने के लिए अब गोदामों को सील करने के निर्देश दिए गए हैं।
SDM की अनुमति के बिना नहीं होगा एक दाना भी बाहर
नए आदेश के तहत:
किसी भी गोदाम से गेहूँ की निकासी SDM की लिखित अनुमति के बिना नहीं होगी
निकासी के समय प्रशासन का अधिकृत प्रतिनिधि मौजूद रहेगा
फ्यूमिगेशन (कीटोपचार) के लिए भी पहले अनुमति लेना अनिवार्य
स्टॉक में गड़बड़ी पाए जाने पर गोदाम मालिक जिम्मेदार होगा
प्रशासन की सख्त निगरानी
सभी अनुविभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि:
केवल नया और गुणवत्तापूर्ण गेहूँ ही खरीदी केंद्रों तक पहुँचे
किसी भी प्रकार की मिलावट या हेराफेरी न हो
किसानों के हक पर डाका डालने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। सख्त निगरानी से पारदर्शी उपार्जन सुनिश्चित किया जाएगा।”
उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। नियम तोड़ने वाले गोदाम संचालकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
जबलपुर प्रशासन का यह कदम न सिर्फ भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि **MSP का लाभ सीधे असली किसानों तक पहुँचे — बिना किसी बिचौलिये या धोखाधड़ी के।




