प्रतिष्ठित टाइम पत्रिका ने साल 2026 के लिए दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की अपनी वार्षिक सूची जारी कर दी है।
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इस साल की लिस्ट ने भारतीय गलियारों में हलचल मचा दी है क्योंकि लगातार कई वर्षों तक इस सूची का हिस्सा रहे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बार जगह नहीं मिली है।
राजनीतिक श्रेणी में इस बार उन चेहरों का बोलबाला है जो वैश्विक संघर्षों और नई विश्व व्यवस्था के केंद्र में हैं:
डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में उनकी वापसी ने उन्हें सूची में शीर्ष पर रखा है।
शी जिनपिंग: चीन के राष्ट्रपति का दबदबा बरकरार है।
बेंजामिन नेतन्याहू: मध्य-पूर्व के हालातों के बीच इजरायली पीएम की मौजूदगी महत्वपूर्ण है।
पड़ोसी देशों का उदय: नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह और बांग्लादेश के तारिक रहमान ने इस बार सूची में जगह बनाकर दक्षिण एशियाई राजनीति के बदलते समीकरणों को दर्शाया है।
भले ही राजनीतिक मोर्चे पर भारत की मौजूदगी इस बार कम रही हो, लेकिन कॉर्पोरेट और एंटरटेनमेंट जगत में भारतीयों का डंका बजा है। सूची में शामिल तीन प्रमुख भारतीय/भारतीय मूल के नाम हैं:
1. सुंदर पिचाई (CEO, Google):AI की रेस में गूगल के नेतृत्व के लिए।
2. नील मोहन (CEO, YouTube): डिजिटल कंटेंट और इकोनॉमी में प्रभाव के लिए।
3. रणबीर कपूर (अभिनेता):भारतीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर प्रतिनिधित्व देने और अपनी हालिया सफलता के लिए।
2026 की सूची यह साफ करती है कि अब दुनिया की बागडोर तकनीक के हाथों में है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बड़े डेटा केंद्रों के संचालकों को विशेष महत्व दिया गया है:
| हस्ती | संस्थान | क्षेत्र |
| डारियो और डैनिएला एमोडेई | एंथ्रोपिक | AI सुरक्षा और विकास |
सीसी वेई | TSMC | सेमीकंडक्टर चिप निर्माण |
| सारा फ्रायर | OpenAI | जेनरेटिव AI |
| ग्वेन शॉटवेल | SpaceX | अंतरिक्ष अन्वेषण
सिनेमाई जगत से रणबीर कपूर के अलावा हॉलीवुड के कई बड़े नामों ने अपनी जगह बनाई है। जोए सालडाना, बेनिसियो डेल टोरो, और एथन हॉक जैसे कलाकारों को उनके अभिनय और कला के प्रति योगदान के लिए सम्मानित किया गया है।
इस सूची में मार्क कार्नी (कनाडा) और क्लाउडिया शिनबॉम (मेक्सिको) जैसे नए नेतृत्वकर्ताओं का शामिल होना यह दिखाता है कि टाइम पत्रिका इस बार ‘बदलाव’ और ‘उभरते नेतृत्व’ को अधिक प्राथमिकता दे रही है।
टाइम-100 की यह सूची 2026 के वैश्विक परिदृश्य को दर्शाती है, जहाँ एक तरफ पुराने दिग्गजों की वापसी हुई है, वहीं दूसरी तरफ भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (सिनेमा और टेक) का प्रभाव तो दिख रहा है, लेकिन राजनीतिक प्रभाव के पैमाने पर इस बार बदलाव महसूस किया गया है।




