मझौली स्थित आस्था के केंद्र बड़ा देव देवालय के आसपास वन भूमि पर हुए अवैध कब्जे को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर अब सवाल उठने लगे हैं।
मझौली
जबलपुर वन मंडल अधिकारी (DFO) के सख्त तेवर और मौके पर पहुंचकर दिए गए निर्देशों के बावजूद, धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
दिखावा साबित हो रही डीएफओ की सख्ती!
बीते गुरुवार को स्वयं डीएफओ ने बड़ा देव देवालय क्षेत्र का निरीक्षण किया था। अधिकारियों की मौजूदगी में बड़ी गहमागहमी के साथ सीमांकन (परिसीमन) की प्रक्रिया शुरू की गई थी। उस दौरान सख्त लहजे में चेतावनी दी गई थी कि वन भूमि पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि इस हाई-प्रोफाइल निरीक्षण को एक हफ्ता बीतने को है और मौके से एक इंच भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया है।
मझौली बीट प्रभारी की भूमिका पर सवाल
सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं की मानें तो उच्चाधिकारियों के निर्देश ‘मझौली बीट’ तक आते-आते ठंडे पड़ते दिखाई दे रहे हैं। डीएफओ के दौरे के बाद क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि अब वन भूमि अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त होगी, लेकिन मझौली बीट प्रभारी की सुस्ती या “अनदेखी” के चलते अब तक बुलडोजर तो दूर, एक नोटिस तक का असर नहीं दिख रहा है।
अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद
कार्रवाई के नाम पर हो रही इस देरी ने अतिक्रमणकारियों को और अधिक समय दे दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब खुद जिला स्तर के बड़े अधिकारी आकर निर्देश दे चुके हैं, तो फिर स्थानीय अमला कार्रवाई करने से क्यों बच रहा है? क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक दबाव है या फिर विभाग की मिलीभगत?
आस्था और पर्यावरण दोनों खतरे में
बड़ा देव देवालय न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो धीरे-धीरे पूरी वन संपदा नष्ट हो जाएगी।
सवाल अब भी बरकरार है:
क्या वन विभाग की यह टीम केवल फाइलें भरने और फोटो खिंचवाने के लिए आई थी? आखिर मझौली बीट प्रभारी शासन के आदेशों को जमीन पर उतारने में नाकाम क्यों साबित हो रहे हैं?
ब्यूरो रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़




