मध्य प्रदेश के सरकारी तंत्र में अब फाइलों को दबाकर रखने का खेल खत्म होने वाला है।
भोपाल
वित्त विभाग ने प्रशासनिक ढर्रे को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए एक नई और सख्त गाइडलाइन जारी की है। इस नए आदेश के बाद अब किसी भी विभाग के बाबू या अफसर मुख्यमंत्री (CM) या मुख्य सचिव (CS) से जुड़ी फाइलों को अपनी मेज पर ज्यादा दिनों तक नहीं रोक सकेंगे।
वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, महत्वपूर्ण परियोजनाओं और नीतियों से जुड़ी फाइलों के लिए एक समयसीमा (Deadline) निर्धारित कर दी गई है।
नया नियम: अब किसी भी स्तर के अधिकारी को अधिकतम 10 दिनों के भीतर फाइल का निपटारा करना होगा।
पारदर्शिता: इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली अनावश्यक देरी को रोकना और कामकाज में पारदर्शिता लाना है।
अक्सर देखा जाता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय या मुख्य सचिव स्तर से जारी निर्देश वित्त विभाग में जाकर ‘लालफीताशाही’ (Red Tapism) का शिकार हो जाते हैं।
बजट और मंजूरी: कई बड़ी विकास योजनाओं के लिए वित्तीय मंजूरी की फाइलें महीनों तक अटकी रहती हैं।
जवाबदेही: नई गाइडलाइन के बाद अब यह स्पष्ट होगा कि फाइल किस अधिकारी के पास कितने समय तक रुकी रही। यदि 10 दिन से अधिक समय लगता है, तो संबंधित अधिकारी को जवाब देना होगा।
तेजी से होगा विकास: सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं को समय पर वित्तीय स्वीकृति मिल सकेगी।
अंकुश: फाइलों को ‘होल्ड’ करके भ्रष्टाचार या दबाव बनाने वाले तत्वों पर लगाम लगेगी।
सीधी निगरानी: अब मुख्यमंत्री सचिवालय सीधे फाइलों की मूवमेंट को ट्रैक कर सकेगा।
मध्य प्रदेश सरकार का यह फैसला प्रदेश में “गुड गवर्नेंस” (सुशासन) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या जमीनी स्तर पर अधिकारी इस 10 दिन की डेडलाइन का पालन करते हैं या फाइलों का अंबार पुराने ढर्रे पर ही लगा रहता है।




