मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में रक्षित निरीक्षक (RI) के पद पर तैनात राहुल पाण्डेय की मुश्किलें अब उनके पद और रसूख से बाहर निकल चुकी हैं।
कटनी
बिना अनुमति ‘विदेशी सैर’ से लेकर आय से अधिक संपत्ति के संगीन आरोपों ने खाकी को दागदार कर दिया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) के कड़े रुख के बाद अब उनके विरुद्ध विभागीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
राहुल पाण्डेय पर सबसे प्रमुख और तात्कालिक आरोप नियम विरुद्ध थाईलैंड (फुकेत) की यात्रा का है। सरकारी सेवा शर्तों के अनुसार, किसी भी पुलिस अधिकारी को देश की सीमा छोड़ने से पहले भोपाल मुख्यालय से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है।
* पाण्डेय का तर्क: विभाग को दिए स्पष्टीकरण में उन्होंने कहा कि उन्हें “अनुमति के इंतजार की अनिवार्यता” का पता नहीं था।
* विभाग का रुख: पुलिस मुख्यालय ने इस तर्क को हास्यास्पद और असंतोषजनक मानते हुए खारिज कर दिया है।
समाजसेवी इंद्र मिश्रा की शिकायत पर हुई गोपनीय जांच में राहुल पाण्डेय की कार्यशैली की कलई खुल गई है। साइबर सेल की लोकेशन रिपोर्ट के अनुसार:
पाण्डेय अक्सर जिला मुख्यालय छोड़कर जबलपुर और होशंगाबाद में समय बिताते थे।
वे कई बार 40 से 64 घंटों तक बिना किसी आधिकारिक अवकाश या सूचना के ड्यूटी से नदारद रहे।
हैरानी की बात: मई 2024 में इन तथ्यों की पुष्टि होने के बावजूद उन पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी, जिससे उनके रसूख का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब इन पुराने मामलों को भी नई जांच में शामिल किया गया है।
डीजीपी और आईजी को भेजी गई ताजा शिकायतों में राहुल पाण्डेय पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं:
* बेनामी संपत्ति: आरोप है कि उन्होंने अपनी गृहिणी माता के नाम पर जबलपुर में करोड़ों की संपत्ति और एक आलीशान रिसॉर्ट बनाया है।
* पद का दुरुपयोग: सरकारी वाहन का निजी कार्यों में उपयोग करना और विरोध करने वालों को पद की धौंस दिखाकर डराना।
* सोशल मीडिया का मोह: वर्दी की गरिमा को ताक पर रखकर इंस्टाग्राम पर रील शेयर करना। आरोप है कि उन्होंने अपनी छवि चमकाने के लिए निजी लड़कों को वीडियो बनाने के काम पर रखा था।
पुलिस विभाग की छवि पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए मुख्यालय ने अब आरआई राहुल पाण्डेय के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई है। जांच का दायरा उनकी संपत्ति, आय के स्रोत और पिछले तीन वर्षों के उनके ड्यूटी रिकॉर्ड तक फैला दिया गया है।
“वर्दी पहनकर रील बनाना और बिना अनुमति विदेशी धरती पर मौज-मस्ती करना अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है। अब उन्हें इन सभी आरोपों का जवाब कोर्ट और विभागीय जांच कमेटी के समक्ष देना होगा।”
मुख्य बिंदु जो चर्चा में हैं: क्या एक पुलिस अधिकारी को ‘विदेश यात्रा’ के नियमों का ज्ञान नहीं था?
करोड़ों का रिसॉर्ट बनाने के लिए पैसा कहाँ से आया?
ड्यूटी से गायब रहने के दौरान वे कहाँ और किन लोगों के संपर्क में थे?




